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भूजल संकट से लडऩे को गाजियाबाद में ‘अमृत कूप’ तैयार!, डाबर इंडिया के सीएसआर फंड से खर्च होंगे 20 लाख रुपये

गाजियाबाद। लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने और वर्षा जल की हर बूंद को सहेजने के लिए जिला प्रशासन ने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल तेज कर दी है। इसी कड़ी में मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ के मार्गदर्शन में ‘अमृत कूप’ अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत डाबर इंडिया लिमिटेड के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहयोग से जनपद के 10 पुराने और अनुपयोगी कुओं का पुनर्जीवन किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंगलवार को विकास भवन स्थित सीडीओ कार्यालय में जिला प्रशासन, डाबर इंडिया लिमिटेड और पूर्वा फाउंडेशन के बीच परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
सीडीओ कुमार सौरभ ने बताया कि जिले में जल संरक्षण के लिए तालाबों के पुनर्जीवन के साथ अब पुराने कुओं को भी उपयोगी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब तक करीब 800 तालाब चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 200 का जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अमृत कूप पहल के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों को आधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणाली से जोड़कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया जाएगा। जनपद में मनरेगा योजना संचालित नहीं होने के कारण तालाबों और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में औद्योगिक संस्थानों के सीएसआर फंड तथा कंपनियों के भूजल पुनर्भरण संबंधी दायित्वों का सहयोग लिया जा रहा है। अमृत कूप परियोजना के तहत सुराना, रावली, दिदौली, दबाना, चुडिय़ाला, फरीदनगर में दो कुएं, फफराना, सारा और सहजनपुर में पुराने कुओं का पुनर्जीवन प्रस्तावित है। जिले में अब तक करीब 180 पुराने और अनुपयोगी कुओं को चिह्नित किया गया है। प्रारंभिक चरण में दो कुओं को पायलट परियोजना के रूप में विकसित किया गया था। अब 10 अतिरिक्त कुओं पर काम कराया जाएगा। प्रत्येक कुएं के पुनर्जीवन पर करीब दो लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके तहत कुओं की सफाई, मरम्मत और संरचनात्मक सुधार कर उन्हें दोबारा उपयोगी बनाया जाएगा। परियोजना के तकनीकी क्रियान्वयन में भूगर्भ जल विभाग सहयोग करेगा। परियोजना के तहत आसपास के मकानों की छतों से वर्षा जल एकत्र कर पाइपलाइन के जरिए फिल्टर चैंबर तक पहुंचाया जाएगा। यहां पानी को छानने के बाद कुओं में प्रवाहित किया जाएगा, जिससे वर्षा जल संचयन के साथ भूजल पुनर्भरण में मदद मिलेगी। सीडीओ कुमार सौरभ ने कहा कि अनुपयोगी हो चुके कुओं को दोबारा जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने औद्योगिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से ऐसे प्रयासों में सहभागिता बढ़ाने की अपील की। जिला प्रशासन बंद और अनुपयोगी बोरवेलों को चिह्नित कर उनकी तकनीकी उपयुक्तता के आधार पर पुनर्स्थापना की संभावनाओं पर भी काम करेगा। इस अवसर पर डाबर इंडिया लिमिटेड के सीएसआर प्रमुख व्यास आनंद, पूर्वा फाउंडेशन के संस्थापक रोहित सांगवान, सूचना आयुक्त तथा भूगर्भ जल विभाग की नोडल अधिकारी सृष्टि जायसवाल सहित संबंधित अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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