स्वास्थ्य सेवाओं पर संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर, काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन-समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग, आठ अक्टूबर से डीएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना

गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सैकड़ों कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर सीएमओ कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने आठ अक्टूबर से डीएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की घोषणा की है।
संविदा कर्मचारियों के आंदोलन का असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। जिला एमएमजी अस्पताल, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सीएचसी मुरादनगर, मोदीनगर, भोजपुर, बम्हेटा, लोनी, डासना और संयुक्त अस्पताल संजयनगर समेत विभिन्न इकाइयों में कर्मचारियों के काम से दूर रहने के कारण कई स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग का काम भी बंद कर दिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी सीएमओ कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर शासन की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से संविदा पर सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण का लाभ नहीं मिल रहा है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर कई बार शासन और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके चलते कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आठ अक्टूबर से डीएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। हालांकि, आंदोलन के दौरान इमरजेंसी सेवाएं यथावत चालू रखने की बात कही गई है, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें न्यायोचित हैं और लंबे समय से लंबित हैं। आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। संघ के अनुसार 12 अक्टूबर को गाजियाबाद के सभी संविदा कर्मचारी लखनऊ कूच करेंगे और वहां बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। संघ की जिला अध्यक्ष हिमानी कौशिक ने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू किया है। यदि इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारियों को कठोर कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


