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मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली, के डॉक्टरों ने 47-वर्षीय महिला की ब्रेस्ट की गांठ निकाली,

मुरादाबाद। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों ने 47-वर्षीय महिला के बाएं ब्रेस्ट में धीरे-धीरे बढ़ रही गांठ को निकालने के लिए लम्पेक्टॉमी (ब्रेस्ट को पूरी तरह हटाए बिना केवल गांठ निकालने की सर्जरी) की।
मुरादाबाद की रहने वाली श्रीमती शालू गुप्ता ने चिकित्सा परामर्श लेने से लगभग दो सप्ताह पहले पहली बार अपने बाएं ब्रेस्ट में गांठ महसूस की थी। ​ चिकित्सकीय जांच और इमेजिंग में निप्पल के पीछे और उसके आसपास कई उभारों वाली एक गांठ का पता चला। आगे की जांच के बाद, उनके परिवार ने सर्जरी के लिए मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली से संपर्क किया।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में ब्रेस्ट एंड रोबोटिक्स ऑन्को सर्जरी की एसोसिएट डायरेक्टर – डॉ. सीमा सिंह, के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने जनरल एनेस्थीसिया देकर महिला के बाएं ब्रेस्ट के ऊपरी अंदरूनी हिस्से से लगभग 4 × 3 सेंटीमीटर की गांठ निकाली, जिसका आकार लगभग एक छोटे नींबू जितना था। गांठ के साथ निप्पल और उसके आसपास की गहरे रंग की त्वचा वाले हिस्से को भी हटाया गया। सर्जरी के दौरान निकाले गए ​टिशूस की शुरुआती जांच में कैंसर के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बाद डॉक्टरों ने ब्रेस्ट के आसपास के ​टिशूस का इस्तेमाल करके रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की, ताकि ब्रेस्ट के प्राकृतिक आकार और बनावट को बहाल करने में मदद मिल सके।
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में ब्रेस्ट एंड रोबोटिक्स ऑन्को सर्जरी की एसोसिएट डायरेक्टर – डॉ. सीमा सिंह, ने कहा, “ब्रेस्ट में होने वाली किसी भी गांठ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, भले ही उसमें दर्द न हो या वह हाल ही में दिखाई दी हो। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने और उचित जांच कराने से गांठ की प्रकृति का पता लगाने तथा सही उपचार तय करने में मदद मिलती है। इस मामले में हमने सर्जरी की योजना बनाते समय गांठ को निकालने के साथ-साथ उसकी स्थिति और ब्रेस्ट के स्वरूप को भी ध्यान में रखा। हमारा उद्देश्य मरीज की चिकित्सकीय समस्या का उपचार करने के साथ-साथ उसके स्वस्थ होने की प्रक्रिया और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना था।”
सर्जरी के बाद मरीज के स्वास्थ्य और रिकवरी पर लगातार नजर रखी गई। मरीज को पहले से टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। ऐसे में, रिकवरी के दौरान इन बीमारियों को नियंत्रित रखने के लिए अस्पताल की एंडोक्राइन टीम ने सर्जिकल टीम के साथ मिलकर काम किया। सर्जरी के दूसरे दिन ऑपरेशन के बाद की जांच में मरीज की स्थिति स्थिर पाए जाने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यह मामला ब्रेस्ट में गांठ होने पर समय रहते जांच कराने, सही निदान करने और उचित उपचार शुरू करने के महत्व को रेखांकित करता है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर में विभिन्न विशेषज्ञताओं की टीम सर्जिकल विशेषज्ञता, रिकंस्ट्रक्शन तकनीकों और समन्वित चिकित्सा देखभाल के माध्यम से मरीजों की रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए काम करती है।

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