शहर-राज्य

ब्रज ने नम आंखों से दी संत रमेश बाबा को अंतिम विदाई, सीएम योगी ने भेजी श्रद्धांजलि 

मथुरा/बरसाना। ब्रजभूमि के प्रसिद्ध संत एवं पद्मश्री से सम्मानित रमेश बाबा को बुधवार को बरसाना ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। संत रमेश बाबा की अंतिम यात्रा में हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और ब्रजवासी उमड़ पड़े। मान मंदिर से निकला बाबा का सजा हुआ डोला ब्रह्माचल पर्वत की परिक्रमा करते हुए आगे बढ़ा तो रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अपने संत को श्रद्धांजलि दी। वातावरण में लगातार राधे-राधे के जयकारे गूंजते रहे और हर आंख नम दिखाई दी।

संत रमेश बाबा का जीवन राधारानी की भक्ति, ब्रज सेवा, गौ सेवा और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित रहा। ब्रज से उनका लगाव इतना गहरा था कि उन्होंने जीवनभर ब्रज की सीमा न छोड़ने का संकल्प निभाया। वर्ष 2019 में जब उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया, तब भी वह सम्मान लेने दिल्ली नहीं गए। उनकी इसी ब्रज-निष्ठा के चलते पद्मश्री सम्मान को गृहण करने उनके प्रतिनिधि पहुंचे। जिन्हें राष्ट्रपति भवन में रमेश बाबा का सम्मान दिया गया। प्रतिनिधि ने राष्ट्रपति भवन में मिले प्रमाण पत्र एवं मेडल को बरसाना पहुंचकर बाबा को सौंपा। उनके लिए यह सम्मान व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ब्रज, गौ सेवा और राधारानी की सेवा का सम्मान था।

रमेश बाबा की प्रमुख सेवाओं में माताजी गौशाला शामिल थी, जो कि लगभग 70 हजार गौवंश का विशाल घर था। जहां निराश्रित और बीमार गोवंश की सेवा का व्यापक कार्य किया जाता है। उनके प्रयासों से गोसेवा के साथ ब्रज संरक्षण और हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भी व्यापक रूप मिला। उनके गोलोकगमन से संत समाज, ब्रजवासियों और देश-विदेश के श्रद्धालुओं में गहरा शोक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संत रमेश बाबा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री की ओर से श्रद्धांजलि देने के लिए कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण बरसाना पहुंचे और पुष्पचक्र अर्पित कर संत को नमन किया।

अंतिम यात्रा के दौरान बरसाना की गलियों से लेकर माताजी गौशाला तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। बाबा के अनुयायियों ने कहा कि संत रमेश बाबा भले ही देह रूप में उनके बीच नहीं हैं, लेकिन ब्रज सेवा, गौ सेवा और राधारानी की भक्ति के रूप में उनकी विरासत सदैव जीवित रहेगी। ब्रज ने अपने एक अनमोल संत और संरक्षक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस होती रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button