ग़ाज़ियाबाद

दूषित पेयजल बना बच्चों की सेहत का दुश्मन, बढ़ रहे पीलिया के मामले

गाजियाबाद। जिले में दूषित पेयजल और अस्वच्छ खानपान बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। प्रदूषित पानी के कारण पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन पांच से छह बच्चों में पीलिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि दूषित पानी की आपूर्ति और संक्रमित भोजन इस समस्या की प्रमुख वजह बन रहे हैं। एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय के अनुसार अस्पताल में आने वाले बच्चों में बुखार, दस्त, उल्टी और आंखों में पीलापन जैसी शिकायतें आम तौर पर देखने को मिल रही हैं। जांच के बाद इनमें पीलिया की पुष्टि हो रही है। उन्होंने बताया कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण वे दूषित पानी से फैलने वाले संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पीलिया मुख्य रूप से हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण से फैलने वाली जलजनित बीमारी है। स्वच्छ पेयजल की कमी और जल स्रोतों के प्रदूषित होने से संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि गर्मी और बरसात के मौसम में इस बीमारी के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो बच्चों के साथ-साथ अन्य आयु वर्ग के लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट भी स्थिति की गंभीरता को दर्शा रही है। विभाग द्वारा पिछले चार महीनों में लिए गए पेयजल नमूनों में 237 सैंपल असंतोषजनक पाए गए हैं। मई माह में जिन स्थानों के पानी के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, उनमें राइज ऑर्गेनिक होम्स, जयपुरिया ग्रीन्स, प्लेटिनियम-321 सोसाइटी, जिंदल पब्लिक स्कूल, शौर्यपुरम, विनोद कुमार आरओ वाटर, क्रिश्चियन नगर तथा जेकेवी इंडस्ट्रीज मोदीनगर जैसे क्षेत्र और संस्थान शामिल हैं। इससे साफ है कि जिले के कई इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शिवी अग्रवाल ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि संक्रमण से बचने के लिए पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद ही पीना चाहिए या प्रमाणित फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सावधानी ही बच्चों को पीलिया सहित अन्य जलजनित बीमारियों के खतरे से बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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