पांच नई गाडिय़ों की बिक्री के बाद रकम हड़पने का आरोप, इंटरनल ऑडिट में खुला बड़ा खेल

गाजियाबाद। शहर के लोहियानगर स्थित महिंद्रा के अधिकृत शोरूम शिवा ऑटो-कार में नए वाहनों की बिक्री के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन ने शोरूम के कुछ कर्मचारियों पर ग्राहकों से वाहन बिक्री की पूरी रकम लेने के बावजूद उसे कंपनी के खाते में जमा न कर निजी स्तर पर हड़प लेने का गंभीर आरोप लगाया है। आंतरिक लेखा परीक्षण में करोड़ों रुपये के लेनदेन में अनियमितताएं उजागर होने के बाद कंपनी की ओर से सिहानी गेट थाने में पूर्व प्रबंधक अश्वनी जादौन एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कंपनी का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में उसे 72 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।
कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि राजेश मेहरोत्रा द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार 21 अप्रैल से 6 मई के बीच कराए गए आंतरिक लेखा परीक्षण के दौरान कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए। जांच में पाया गया कि शोरूम से चार नई स्कॉर्पियो और एक थार रॉक्स वाहन की बिक्री की गई थी, लेकिन इन वाहनों की बिक्री से प्राप्त पूरी धनराशि कंपनी के खाते में जमा नहीं कराई गई। इन पांचों वाहनों की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ 17 लाख रुपये बताई गई है। शिकायत के अनुसार कुछ वाहनों के रिकॉर्ड में आंशिक भुगतान दर्ज किया गया, जबकि शेष रकम का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं मिला। कंपनी का आरोप है कि बिक्री से प्राप्त राशि का एक हिस्सा बैंक खातों में जमा कराया गया, लेकिन बड़ी रकम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि बिक्री की धनराशि को सुनियोजित तरीके से गबन किया गया।
आंतरिक जांच में केवल वित्तीय गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि दस्तावेजों से छेड़छाड़ और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप भी सामने आए हैं। कंपनी का कहना है कि वाहन बिक्री से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बदला गया और कुछ अभिलेखों को नष्ट करने का भी प्रयास किया गया, ताकि अनियमितताओं को छिपाया जा सके। ऑडिट रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किए जाने के बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले इसी शोरूम में एक ग्राहक द्वारा जमकर हंगामा किए जाने का मामला भी चर्चा में आया था। ग्राहक का आरोप था कि शोरूम कर्मचारियों के कहने पर उसने वाहन खरीदने के लिए कंपनी के खाते में भुगतान करने के साथ-साथ कुछ राशि नकद भी दी थी। बाद में वाहन की डिलीवरी और भुगतान संबंधी विवरणों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उस घटना के बाद भी शोरूम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे, लेकिन अब ऑडिट रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस ने कंपनी की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां ऑडिट रिपोर्ट, बैंक खातों, वाहन बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित गड़बड़ी में कितने लोग शामिल थे और रकम किस प्रकार से कंपनी के खाते तक पहुंचने से पहले गायब हुई। इस संबंध में एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच की जा रही है। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं का सत्यापन किया जा रहा है तथा बैंकिंग लेनदेन और वाहन बिक्री अभिलेखों का मिलान कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच में जिन व्यक्तियों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। महिंद्रा शोरूम से जुड़े इस कथित वित्तीय घोटाले ने वाहन कारोबार जगत में हलचल पैदा कर दी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित हेराफेरी का वास्तविक स्वरूप क्या था और इसमें कितने लोग शामिल थे, लेकिन फिलहाल कंपनी द्वारा लगाए गए आरोपों ने शोरूम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



