विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए 20 मॉडल समावेशी विद्यालयों में ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित

गाजियाबाद। विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता (स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी) से प्रभावित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, समान एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में जनपद गाजियाबाद में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मॉडल समावेशी विद्यालय कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित 20 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के लिए एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला तथा शिक्षण-सहायक रेमेडियल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन सोमवार को दुर्गावती देवी सभागार, विकास भवन स्थित मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके लिए अनुकूल शैक्षिक वातावरण तैयार करना और उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना रहा। यह कार्यक्रम पेट्रोनेट एलएनजी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के अंतर्गत चेंजइंक फाउंडेशन तथा राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा अभियान, उत्तर प्रदेश के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ (आईएएस) ने मुख्य अतिथि के रूप में की। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ.पी. यादव, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान तथा जिला समन्वयक (समावेशी शिक्षा) राकेश सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान चेंजइंक फाउंडेशन के राज्य प्रबंधक अशोक लीलड़ ने समावेशी शिक्षा की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता वाले बच्चों की समय पर पहचान कर यदि उन्हें आवश्यक शैक्षिक सहयोग, उचित शिक्षण पद्धति और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो वे भी अन्य बच्चों की तरह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों को सहयोगात्मक शिक्षण पद्धतियों, समावेशी मूल्यांकन प्रणाली तथा ऐसे बच्चों की सीखने की चुनौतियों को समझने और उनके अनुरूप शिक्षण तकनीक अपनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान जनपद के 20 चयनित मॉडल समावेशी विद्यालयों को विशेष रूप से तैयार की गई रेमेडियल किट भी वितरित की गई। इन किटों में उपलब्ध शिक्षण-सहायक सामग्री बच्चों की भाषा, गणित, स्मरण शक्ति, समझने की क्षमता तथा सीखने की प्रक्रिया को अधिक सरल, प्रभावी और रोचक बनाने में सहायक होगी। इसके माध्यम से शिक्षकों को भी कक्षा में ऐसे बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण गतिविधियां संचालित करने में सुविधा मिलेगी। मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता और आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। समावेशी शिक्षा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ऐसा सामाजिक दायित्व है, जिसके माध्यम से प्रत्येक बच्चे को सम्मान, समान अवसर और आत्मविश्वास के साथ आगे बढऩे का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय स्तर पर समय रहते ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जाए तो वे भी समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम में चेंजइंक फाउंडेशन की प्रमुख प्रतिनिधि पूर्णिथा नम्बियार, राज्य प्रतिनिधि अमरेश चन्द्र तथा राज्य प्रबंधक अशोक लीलड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण एवं आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समावेशी शिक्षा को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने तथा विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से जनपद के चयनित विद्यालय समावेशी शिक्षा के प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित होंगे और भविष्य में अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।



