ग़ाज़ियाबाद

रासायनिक और परमाणु आपदाओं से निपटने का दमखम दिखाएंगी आठ राज्यों की टीमें

गाजियाबाद। रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने और आपदा मोचन बलों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), गाजियाबाद में द्वितीय राष्ट्रीय राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) सीबीआरएन प्रतियोगिता-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। 2 से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता का उद्घाटन एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक अनिल बिष्ट ने किया। इसमें देश के आठ राज्यों की एसडीआरएफ टीमें अपनी तकनीकी दक्षता, कार्यकुशलता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन करेंगी। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात की एसडीआरएफ टीमें हिस्सा ले रही हैं। उद्घाटन समारोह में डीआईजी अनिल बिष्ट ने सभी प्रतिभागी टीमों का स्वागत करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाओं की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आपदा प्रबंधन से जुड़े बलों का प्रशिक्षित, दक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम होना बेहद जरूरी है। डीआईजी ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं जवानों को अपनी कार्यकुशलता, तकनीकी दक्षता, टीम भावना और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर देती हैं। साथ ही अलग-अलग राज्यों की टीमें अपने अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा कर सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में आपसी समन्वय मजबूत होगा और बचाव अभियान अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किए जा सकेंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अनुशासन, खेल भावना और पूर्ण समर्पण के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने का आह्वान किया। प्रतियोगिता का समापन समारोह 5 नवंबर को एनडीआरएफ के महानिदेशक की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विजेता और उपविजेता टीमों को नकद पुरस्कार, पदक और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य सीबीआरएन आपातकालीन परिस्थितियों में एसडीआरएफ जवानों की परिचालन क्षमता, तकनीकी दक्षता, त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी तालमेल को मजबूत करना है, ताकि किसी भी आपदा के दौरान जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ की यह पहल देश की आपदा मोचन इकाइयों को अधिक सक्षम और तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

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