रावण के पुतले में बारूद बना आफत, एक के बाद एक पांच धमाके; पांच घायल

गाजियाबाद। साहिबाबाद के रामलीला मैदान, शनि चौक के पीछे लाजपत नगर स्थित सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में सोमवार सुबह रावण का पुतला तैयार करते समय एक के बाद एक पांच धमाके होने से अफरा-तफरी मच गई। धमाकों के बाद हॉल में भीषण आग लग गई और भवन की दो दीवारें गिर गईं। हादसे में पुतला तैयार करने वाले ठेकेदार समेत पांच लोग घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली के जीटीबी और सफदरजंग अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी मिली है। धमाकों की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास के कुछ मकानों में भी दरारें आने की बात सामने आई है। फायर विभाग के कंट्रोल रूम को सुबह 9:26 बजे रामलीला मैदान स्थित पटाखों की दुकान में आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद सौरभ कुमार सिंह, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी साहिबाबाद और फायर स्टेशन साहिबाबाद से तीन फायर टेंडर तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किए गए। दमकल टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली तो पता चला कि आग किसी पटाखे की दुकान में नहीं, बल्कि रामलीला मैदान के पीछे स्थित सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में लगी थी। फायर यूनिट ने तत्काल पंपिंग कर आग पर काबू पाया और उसे पूरी तरह बुझाने के बाद पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान सामने आया कि हॉल में पिछले दो-तीन दिनों से रामलीला कार्यक्रम के लिए रावण का पुतला तैयार किया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुतले में आतिशबाजी लगाने के लिए बारूद या अन्य विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक विस्फोट होने से आग फैल गई। विस्फोट के प्रभाव से भवन की दो दीवारें भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गईं।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सौरभ कुमार सिंह के निर्देशन में दमकल टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग को नियंत्रित किया। आग को समय रहते बुझा दिए जाने से आसपास के क्षेत्र में आग फैलने की आशंका टल गई। फायर कर्मियों ने आग बुझाने के बाद घटनास्थल की गहन जांच की और घायलों की स्थिति की जानकारी लेने के लिए अस्पताल भी पहुंचे। दमकल विभाग की तत्परता से आग को नियंत्रित करने और स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण सफलता मिली। घायलों में ठेकेदार अनिल, निवासी पिलखुवा, हापुड़, उसका बेटा ऋषभ तथा हरेंद्र शामिल बताए गए हैं। दो अन्य घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। फायर विभाग को अस्पताल से जानकारी मिली कि घायलों को बेहतर उपचार के लिए जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच स्थित सामुदायिक केंद्र के हॉल में रावण का पुतला तैयार करने के दौरान आतिशबाजी और बारूद जैसी सामग्री का इस्तेमाल किसकी अनुमति से किया जा रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों में भी लोग दहशत में बाहर निकल आए। कुछ मकानों की दीवारों में दरारें आने की बात भी सामने आई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बारूद और आतिशबाजी वहां कैसे पहुंची और सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि इस गतिविधि की जानकारी स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग और संबंधित निगरानी तंत्र को थी या नहीं। यदि जानकारी थी तो सुरक्षा इंतजामों की पर्याप्तता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठेंगे और यदि जानकारी नहीं थी तो स्थानीय स्तर की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी होगी। फायर विभाग की त्वरित कार्रवाई ने आग को फैलने से रोकते हुए संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई। सीएफओ सौरभ कुमार सिंह के निर्देशन में दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर जिस तत्परता से आग पर काबू पाया, उसकी स्थानीय लोगों ने भी सराहना की। अब पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और सुरक्षा मानकों में हुई चूक की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।


