डीएम ने 60 वर्ग मीटर वाले स्थलों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश

-पीएम-राहत योजना में सात दिन तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज
गाजियाबाद। जिले में बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों को देखते हुए ईवी चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार की कवायद शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिले में उपयुक्त स्थानों को चिन्हित कर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सड़क दुर्घटना पीडि़तों को तत्काल कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने के लिए पीएम-राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गुरुवार को ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाने के संबंध में बैठक हुई। इसमें सड़क किनारे, पेट्रोल पंपों के आसपास, मॉल, व्यावसायिक भवनों, आवासीय सोसाइटी और अन्य उपयुक्त स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। डीएम ने निर्देश दिए कि करीब 60 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले उपयुक्त स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों से अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी भूमि, पार्किंग स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों की सूची तैयार कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जिले में पर्याप्त चार्जिंग सुविधाओं का होना जरूरी है। इसके लिए नगर निकायों, विकास प्राधिकरण, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग, पेट्रोलियम कंपनियों, आवासीय सोसाइटियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्रवाई पूरी करें, ताकि जिले में इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को सुविधाजनक चार्जिंग व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन चंद्र वैश्य सहित स्वास्थ्य विभाग, एआरटीओ, पुलिस विभाग और संबंधित निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके बाद जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री-सड़क दुर्घटना पीडि़तों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (पीएम-राहत) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य, परिवहन, पुलिस और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। डीएम ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति के लिए गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलने से पीडि़त की जान बचाने में मदद मिल सकती है। इसलिए किसी भी स्तर पर उपचार में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ लगातार समन्वय रखा जाए। योजना के तहत नामित अस्पतालों में पहुंचने वाले सड़क दुर्घटना पीडि़तों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तत्काल उपचार दिया जाए। डीएम ने कहा कि जो निजी अस्पताल अभी योजना के तहत नामित नहीं हैं, लेकिन नियमानुसार नामित किए जा सकते हैं, उनसे संपर्क कर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराते हुए उन्हें योजना में शामिल कराया जाए। निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति के अस्पताल पहुंचते ही उसकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक चिकित्सा एवं स्थिरीकरण उपचार उपलब्ध कराया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीडि़त को अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार सात दिनों तक उपलब्ध कराया जाता है। दुर्घटना किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई हो, योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र पीडि़त को इसका लाभ दिया जाना है।



