गोवर्धन के रामकिशन सांवरिया सेवा सदन में भजन-संकीर्तन, गुरु वंदन व भंडारे के साथ धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

अपने शिष्यों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है गुरु : पं. रामकिशन महाराज
मथुरा/गोवर्धन। बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कस्बे में बंशीवट पर अपना घर आश्रम के नजदीक स्थित रामकिशन सांवरिया सेवा सदन परिसर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव गुरुजी पंडित रामकिशन महाराज के सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान भजन-संकीर्तन के साथ गुरु पूजा तथा विशाल भंडारा आयोजित किया गया जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं श्यामानंद महाराज ने अपनी मधुर ओजस्वी वाणी से गुरु वंदन तथा गिरिराज जी की महिमा का बखान करते हुए विभिन्न भजनों के माध्यम से समां बांध दिया।
इस मौके पर आयोजित भजन-संकीर्तन के दौरान श्यामानंद महाराज ने सारे तीर्थ धाम आपके चरणों में हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में…, हमारो धन राधा श्री राधा श्री राधा…, आस करूं ब्रजवास तलहटी गोवर्धन की में…आदि भजनों के माध्यम से गुरु की महिमा तथा गिरिराज जी का जमकर बखान किया। इस दौरान उपस्थित भक्तगण भजनों की धुन पर झूमने पर मजबूर हो गए और गिरिराज जी की भक्ति में मदमस्त होकर घंटो तक जमकर झूमे। वहीं पं. रामकिशन महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिष्य के जीवन में जब गुरु आता है तो वह उसे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु के बिना भक्तिमार्ग पर चलना तथा ज्ञान प्राप्त करना आसान नहीं है इसीलिए गुरु का दर्जा भगवान से भी बढ़कर बताया गया है और गुरु शिष्य का रिश्ता बहुत ही पवित्र रिश्ता है। इस दौरान उपस्थित लोगों ने गुरु वंदन के साथ व्यास पूजा भी की तथा उपस्थित शिष्यों ने अपने गुरु को पुष्पमाला तथा पगड़ी पहनाकर भरपूर मान-सम्मान दिया तथा गुरुजी से आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात कार्यक्रम के अंत में गिरिराज जी का भोग लगाकर रामकिशन सांवरिया सेवा सदन परिसर में भंडारा प्रारंभ हुआ जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम स्थल गिरिराज जी के जयकारों से पूरी तरह गूंजायमान हो उठा। इस अवसर पर गुरु माता उर्मिला देवी, विनोद शर्मा, इंद्र सिंह तंवर दिल्ली, विजय सिंह मीणा, राजस्थान से गंगा सिंह, मध्य प्रदेश से डेविड, गुजरात से राम सिंह, चित्रकूट से यश, रामबाबू, गोविंद सिंह, जसवंत, अनिल जांगड़ा, रामदयाल आदि सहित अनेक भक्तगण मौजूद थे।



