आबादी से रेस्क्यू किए गए पांच रैट स्नेक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में छोड़े गए

टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी और वन विभाग की संयुक्त पहल, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का दिया संदेश
वेलकम इंडिया पीलीभीत
पीलीभीत। गांवों और शहर के आबादी वाले क्षेत्रों में निकलने वाले सांपों को लेकर अक्सर लोगों में भय का माहौल बन जाता है। कई बार डर के कारण लोग सांपों को मार देते हैं, जिससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है। इसी बीच वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित रेस्क्यू किए गए पांच रैट स्नेक को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज के उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से रिलीज किया गया।पांचों रैट स्नेक का रेस्क्यू और रिलीज कार्य टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के माध्यम से हरीपुर रेंज के वन विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से किया गया। आबादी वाले क्षेत्रों से सांपों को रेस्क्यू करने के बाद उन्हें पूरी सावधानी के साथ सुरक्षित रखा गया। इसके बाद वन क्षेत्र में उनकी प्राकृतिक जीवनशैली और पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त स्थान का चयन किया गया, जहां उन्हें जंगल में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया।रैट स्नेक यानी धामन सांप पारिस्थितिकी तंत्र के बेहद महत्वपूर्ण सदस्य माने जाते हैं। ये मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों की संख्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी किसानों के लिए भी प्राकृतिक रूप से लाभकारी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश परिस्थितियों में आबादी में दिखाई देने वाले ऐसे सांपों को मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बेहतर विकल्प है।इस अभियान ने यह संदेश भी दिया कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव बस्तियों में आने वाले वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता भी संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने से जहां वन्यजीवों की रक्षा होती है, वहीं लोगों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व की दिशा में भी सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।
वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों की यह पहल स्थानीय लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है। जरूरत है कि आबादी में सांप दिखाई देने पर घबराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना दी जाए, ताकि वन्यजीव और इंसान दोनों सुरक्षित रह सकें।



