ब्रजवासियों के निष्काम प्रेम और सेवा भाव से अभिभूत हुए राधारानी ब्रजयात्रा के यात्री

धानौता में बुलडोजर से हुई पुष्पवर्षा, बैंडबाजों के साथ अगवानी कर ग्रामीणों ने अपने भट्ठे पर कराया यात्रियों का प्रवास
मथुरा /कोसीकला। ब्रजभूमि का कण-कण प्रेम और भक्ति से सराबोर है। यहां की रज में भी भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधारानी की लीलाओं की अनुभूति होती है। ब्रज का यही प्रेम और आत्मीयता है, जो यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को अपना बना लेती है। राधारानी ब्रजयात्रा के धानोता पड़ाव पर ब्रजवासियों के इसी निष्काम प्रेम, सेवा और समर्पण के भाव ने यात्रियों को भावविभोर कर दिया।
यात्रा के दौरान मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रजभूमि का प्रत्येक रज कण साक्षात परब्रह्म के स्वरूप का अनुभव कराता है, क्योंकि परमात्मा स्वयं प्रेम स्वरूप हैं और उस दिव्य प्रेम की पराकाष्ठा ब्रजभूमि में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि यात्रियों का ग्रामीणों से कोई पारिवारिक संबंध नहीं होता, फिर भी ब्रजवासी जिस आत्मीयता और निष्काम भाव से उनकी सेवा करते हैं, वैसी सेवा तो कई बार सगे-संबंधी भी नहीं कर पाते। यही ब्रज की वास्तविक पहचान और यहां की संस्कृति का वैभव है।
यात्रा के भिड़ूखी पहुंचने पर ग्रामीणों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रियों का स्वागत किया। यात्रियों ने गांव स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में दर्शन किए। इस अवसर पर ग्राम प्रधान ने भी यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा बांसे पहुंची, जहां प्रभातफेरी मंडल के सदस्यों ने पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और बालभोग के साथ यात्रियों का सत्कार किया।
बांसे में बाबा नृसिंह दास ने शेषशायी भगवान की प्राकट्य लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि गांव के सरोवर से ही शेषशायी भगवान का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद उन्हें शेषशायी मंदिर में विराजमान कराया गया। मंदिर में दर्शन के दौरान भक्त बालक दीपक ने यात्रियों के लिए हलवे का प्रसाद वितरित कर सेवा की। पौड़ानाथ शेषशायी भगवान के दर्शन करने के बाद यात्रा बरका पहुंची, जहां ग्रामीणों ने बालभोग कराकर यात्रियों का स्वागत किया। इस अवसर पर आचार्य महेश शर्मा ने प्रभातफेरी मंडल के सदस्यों को संबोधित करते हुए हरिनाम संकीर्तन की महिमा बताई।
यात्रा का धानोता पहुंचने पर ऐसा आत्मीय स्वागत हुआ, जिसने ब्रज के अतिथि सत्कार की अनूठी छटा बिखेर दी। गांव के विष्णु स्वरूप और देवेंद्र चौधरी ने बुलडोजर के माध्यम से पुष्पवर्षा कराई। बैंडबाजों की मधुर धुनों के बीच यात्रियों की अगवानी की गई। ग्रामीणों ने अपने भट्ठे पर यात्रियों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था की और सभी को स्वादिष्ट भोजन कराया। ब्रज की परंपरा के अनुरूप किए गए इस आत्मीय सत्कार से यात्री अभिभूत नजर आए।
यात्रा के ब्रजदास एवं महंत ब्रजशरण दास ने ग्रामीणों की सेवा भावना और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि ब्रजवासियों का यही प्रेम और समर्पण ब्रजयात्रा की सबसे बड़ी पूंजी है। यहां श्रद्धालुओं को केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि ब्रज की उस प्रेममयी संस्कृति का साक्षात्कार भी होता है, जिसमें अतिथि को अपना मानकर उसकी सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।


