ग़ाज़ियाबाद

सेल्सफोर्स के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में बीटेक और डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

गाजियाबाद। डासना स्थित एसडीजीआई ग्लोबल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की ओर से सेल्सफोर्स के सहयोग से शुक्रवार को ‘एआईफोर्स’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बीटेक (ऑनर्स) और डिप्लोमा पाठ्यक्रम के 450 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक तकनीकों, डिजिटल व्यावसायिक समाधानों और उनके वास्तविक उपयोग की जानकारी देना था। उद्योग विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तकनीकी बदलावों और रोजगार के नए अवसरों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के सभागार में स्वागत समारोह, परिचय फिल्म, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) जयदीप कुमार और संकाय सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर किया। कार्यशाला में सेल्सफोर्स के प्रमुख विकास विशेषज्ञ सत्य शेखर चेगोंडी, आईडी8एनएक्सटी के शुभम शक्ति, स्टैनफोर्ड डिसूजा और फातिमा बंदूकवाला, देवआरंभ के पुनीत पांडेय तथा यूबीएस की सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूर्वा गुप्ता ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को सेल्सफोर्स तकनीकी व्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एजेंट, बुद्धिमान स्वचालन और व्यावसायिक उपयोगों की जानकारी दी गई। व्यावहारिक सत्रों में एजेंटफोर्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एजेंट तैयार करने, कार्यप्रवाह को स्वचालित बनाने और डिजिटल व्यावसायिक समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कंपनियों और उद्योगों में किस प्रकार किया जा रहा है। इससे उन्हें कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोडऩे का अवसर मिला। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों से परिचित कराने के साथ उनमें नवाचार और तकनीकी विकास के प्रति रुचि बढ़ाती हैं। प्रशासन के प्रो-चांसलर पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल समाधानों का व्यावहारिक ज्ञान बेहद जरूरी है। ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करती हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद और व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को तकनीक के वास्तविक उपयोग समझने में मदद करते हैं। वहीं, निदेशक प्रो. (डॉ.) जयदीप कुमार ने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों को समझने और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने का अवसर मिला। कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को ई-प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन नव्या और योगिता ने किया। विश्वविद्यालय के तकनीकी क्लब ‘टेकवेव्सÓ ने आयोजन में सहयोग दिया। समापन सत्र में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कमलेश कुमार गौतम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन में संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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