ध्रुव की अटूट भक्ति से अजामिल उद्धार तक, भागवत कथा में बही भक्ति की अविरल धारा
– व्यासपीठ से गजेंद्रमुखी पीठाधीश्वर मनीष पूर्णानंद महाराज ने की भक्ति रस की वर्षा
गोवर्धन। परम पावन गोवर्धन धाम स्थित श्री गजेंद्रमुखी आश्रम में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गिरिराज धरण की जय-जयकार और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कथा का शुभारंभ हुआ। कथा पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भगवान की भक्ति में भाव-विभोर नजर आए।
कथा के तृतीय दिवस महाराज श्री ने ध्रुव चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव ने अपनी अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर भगवान को प्राप्त किया।
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य को परिस्थितियां कैसी भी मिलें, भगवान की भक्ति और स्मरण का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
कथा के दौरान महाराज श्री की प्रत्येक वाणी पर पंडाल में ‘राधे-राधे’ और ‘गिरिराज महाराज की जय’ के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण करते रहे।
कथा विश्राम से पूर्व श्री गजेंद्रमुखी गिरिराज मंदिर के सेवायत श्री बंसी कृष्ण जी महाराज ने अपने मधुर एवं सारगर्भित प्रवचनों से श्रद्धालुओं को गोवर्धन धाम की महिमा और गिरिराज महाराज की कृपा का भावपूर्ण स्मरण कराया।
भागवत कथा में गोवर्धन, मथुरा, वृंदावन सहित दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा रूपी अमृत का पान किया। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण बना रहा।
कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक श्री गजेंद्रमुखी आश्रम, गोवर्धन में चल रही है।
इस अवसर पर
बंसी कृष्णम महाराज, व्यापार मंडल अध्यक्ष गणेश पहलवान, डॉक्टर हरेंद्र गुप्ता, डॉक्टर सुरेश चंद्र अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, राजेश पाठक, विष्णु सैनी, राम, कुसुम रानी, गीतिका पहलवान उपस्थित रहे।



