BAREILLY SSP ने जारी किया 29 थानों का रिपोर्ट कार्ड, साइबर क्राइम में किला बना सिकंदर, इज्जतनगर फिसड्डी

बरेली। साइबर ठगी के मामलों में अब सिर्फ मुकदमा दर्ज कर फाइल आगे बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। पीड़ित का पैसा वापस कितना कराया, संदिग्ध मोबाइल नंबर कितने ब्लॉक किए और शिकायतों का निस्तारण कितनी तेजी से हुआ इन सबका हिसाब थाने की रैंक तय करेगा। एसएसपी अनुराग आर्य ने जिले के 28 थानों और साइबर थाने का रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया है। 200 अंकों की इस परीक्षा में किला थाना 145.08 अंक लेकर नंबर-1 बना, जबकि इज्जतनगर सिर्फ 24.93 अंक के साथ सबसे आखिरी यानी 29वें स्थान पर रहा।
रैंकिंग के टॉप-3 में मुकाबला बेहद करीबी रहा। किला थाना 145.08 अंक लेकर पहले स्थान पर रहा तो हाफिजगंज 143.43 अंक के साथ दूसरे नंबर पर पहुंचा। साइबर थाना 142.13 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रहा। यानी पहले और तीसरे स्थान के बीच महज 2.95 अंकों का अंतर रहा। फतेहगंज पूर्वी को 139.72 अंक के साथ चौथा और आंवला को 138.48 अंक के साथ पांचवां स्थान मिला। अलीगंज ने 136.16 अंक हासिल कर छठा स्थान बनाया। मीरगंज 132.37 अंक के साथ सातवें और प्रेमनगर 131.68 अंक लेकर आठवें स्थान पर रहा। फतेहगंज पश्चिमी को 130.90 अंक के साथ नौवीं रैंक मिली, जबकि 127.45 अंक हासिल कर शेरगढ़ टॉप-10 में आखिरी स्थान पर रहा।
इज्जतनगर का प्रदर्शन सबसे खराब, बारादरी-कोतवाली भी बॉटम-3 में
रिपोर्ट कार्ड में सबसे बड़ा झटका शहर के प्रमुख थानों को लगा है। इज्जतनगर सिर्फ 24.93 अंक हासिल कर 29वें यानी अंतिम पायदान पर पहुंच गया। बारादरी 58.84 अंक लेकर 28वें और कोतवाली 68.61 अंक के साथ 27वें स्थान पर रही। बहेड़ी को 72.56 अंक के साथ 26वीं और भोजीपुरा को 93.12 अंक के साथ 25वीं रैंक मिली। वहीं निचली रैंकिंग में शीशगढ़ 95.12 अंक के साथ 24वें और देवरनियां 99.99 अंक लेकर 23वें स्थान पर रहा। इसके बाद भमौरा 22वें, कैंट 21वें और शाही 20वें स्थान पर रहा। इस तरह पुलिस की नई रैंकिंग ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधों पर कार्रवाई में जिले के थानों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर है।
FIR से पैसा वापस कराने तक, 14 कसौटियों पर होगी परीक्षा
थानों की रैंकिंग महज दर्ज मुकदमों की संख्या देखकर नहीं बनाई जाएगी। इसके लिए 14 अलग-अलग पैमाने और कुल 200 अंक तय किए गए हैं। इनमें NCRP शिकायतों का निस्तारण, FIR का पंजीकरण और अपलोड, साइबर ठगी की रकम पर लियन, CEIR के जरिए मोबाइल बरामदगी, संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक करना, पीड़ितों की रकम वापस कराने वाला Money Restoration Module, GRM और JIMS से जुड़े मामलों का निस्तारण शामिल है। नई व्यवस्था में पेंडेंसी थानों को भारी पड़ सकती है। Money Restoration Module (MRM) और GRM का प्रत्येक मामला लंबित रहने पर एक-एक अंक काटा जाएगा। संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉकिंग से जुड़ी ग्रिवांस लंबित रखने पर प्रति केस दो अंक की कटौती होगी। यानी जितनी ज्यादा पेंडेंसी, उतना ही रैंकिंग में नीचे जाने का खतरा रहेगा।
हर महीने खुलेगा रिपोर्ट कार्ड, टॉप-3 की बल्ले-बल्ले
यह रैंकिंग एक बार की कवायद नहीं है। हर महीने जिले के सभी 28 थानों और साइबर थाने के काम का इन्हीं 14 कसौटियों पर दोबारा हिसाब होगा। पहले स्थान पर आने वाली साइबर टीम को 10 हजार रुपये, दूसरे स्थान वाली टीम को 7,500 रुपये और तीसरे स्थान वाली टीम को 5 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। रैंकिंग में नीचे रहने वालों के लिए यह रिपोर्ट कार्ड परेशानी बढ़ा सकता है। फिलहाल आखिरी तीन टीमों को चेतावनी जारी की गई है। आगे भी तय मानकों पर प्रदर्शन कमजोर रहा तो संबंधित थाना प्रभारी और साइबर टीम के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी साइबर अपराधों पर कार्रवाई अब सीधे थानेदारों के प्रदर्शन से जोड़ दी गई है।



