राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बना गरीब परिवार के लिए वरदान, जन्मजात हृदय रोग से पीडि़त बच्चे की बची जान-0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कार्यक्रम के तहत जांच से लेकर सर्जरी तक सभी सुविधाएं नि:शुल्क

गाजियाबाद। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और समय पर की गई चिकित्सकीय कार्रवाई ने एक डेढ़ वर्षीय मासूम को नई जिंदगी दे दी। जन्मजात हृदय रोग से पीडि़त आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के इस बच्चे का समय रहते पता लगाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में सफल हृदय सर्जरी कराई गई। ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और परिवार ने स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया है। डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार ने बताया कि विजयनगर निवासी शशि कुमार अपने डेढ़ वर्षीय बेटे काव्या को लेकर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। बच्चे की जांच के दौरान आरबीएसके टीम के चिकित्सकों को उसमें जन्मजात हृदय रोग के लक्षण दिखाई दिए। तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण के बाद बच्चे को विशेषज्ञ उपचार के लिए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, नोएडा भेजा गया। उन्होंने बताया कि विजयनगर आरबीएसके टीम के डॉ. चेतन वर्मा एवं डॉ. आकाश वत्स ने बच्चे की समय रहते पहचान कर सही निर्णय लिया। इसके बाद नोएडा स्थित विशेषज्ञ अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने बच्चे का सफल हृदय ऑपरेशन किया। लगभग एक वर्ष दस माह आयु और 10.6 किलोग्राम वजन वाले इस बच्चे की सर्जरी सफल रही और अब उसकी स्वास्थ्य स्थिति पूरी तरह सामान्य है। डॉ. रविन्द्र कुमार ने बताया कि बच्चे के पिता शशि कुमार और माता प्रीति आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यदि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का सहयोग नहीं मिलता तो महंगी हृदय सर्जरी कराना उनके लिए संभव नहीं था। इस योजना के तहत बच्चे की जांच, रेफरल, उपचार और ऑपरेशन सहित सभी चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात दोष, गंभीर बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों तथा विकास संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं और आवश्यकता पडऩे पर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाता है। डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि विजयनगर की आरबीएसके टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर जरूरतमंद बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही है। समय पर पहचान और त्वरित उपचार के कारण अनेक बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी असामान्य लक्षण दिखाई दें तो उसे छिपाने के बजाय तत्काल सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं, ताकि समय रहते उपचार कर बच्चे का स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।



