ग़ाज़ियाबाद

विश्व रक्तदाता दिवस पर 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ में शपथ ग्रहण और स्वैच्छिक रक्तदान अभियान का आयोजन

गाजियाबाद। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) द्वारा मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सोमवार को स्वैच्छिक रक्तदान एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वाहिनी मुख्यालय में शपथ ग्रहण समारोह के साथ व्यापक रक्तदान अभियान चलाया गया, जिसमें अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और बचावकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए रक्तदान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना तथा जरूरतमंद मरीजों के जीवन की रक्षा के लिए रक्त उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित करना था। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सेवा, समर्पण और मानवता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। वाहिनी मुख्यालय में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प्रवर श्रेणी) डॉ. मलिक नसीर अहमद ने उपस्थित अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और बचावकर्मियों को स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे स्वयं नियमित रक्तदान करें तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जिससे किसी अनजान व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है और इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य कोई नहीं हो सकता। शपथ ग्रहण के बाद आयोजित रक्तदान अभियान में वाहिनी मुख्यालय के 30 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इसके अलावा 8वीं वाहिनी के 25 बचावकर्मियों ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में पहुंचकर रक्तदान किया। इस प्रकार कुल 55 अधिकारियों और बचावकर्मियों ने रक्तदान कर समाज के सामने सेवा और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। रक्तदान करने वाले जवानों ने कहा कि मानव जीवन को बचाने में रक्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, शल्य चिकित्सा और आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा नियमित रक्तदान किया जाना समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी भ्रम या आशंका से दूर रहकर रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि स्वैच्छिक रक्तदान न केवल किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देता है, बल्कि यह समाज में परस्पर सहयोग और मानवता की भावना को भी मजबूत बनाता है। रक्तदान करने से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहित करता है। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल केवल आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। रक्तदान अभियान इसी सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। जवानों द्वारा प्रदर्शित सेवा भावना और मानव कल्याण के प्रति समर्पण एनडीआरएफ के आदर्श वाक्य  ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्रÓ को वास्तविक रूप में चरितार्थ करता है। विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज को यह संदेश देने में सफल रहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सा आवश्यकता नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा का सबसे बड़ा माध्यम है। एनडीआरएफ के अधिकारियों और बचावकर्मियों की इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सेवा और समर्पण की भावना ही किसी भी संगठन की सबसे बड़ी पहचान होती है।

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