मानकों पर खरे नहीं उतरे 10 आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल, डीएम ने कार्रवाई का दिया निर्देश

संतकबीरनगर। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जनपद में इम्पैनल्ड निजी अस्पतालों की गुणवत्ता, सेवाओं और निर्धारित मानकों की समीक्षा की। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर 10 अस्पतालों की स्थिति असंतोषजनक पाए जाने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा गठित टीम ने वर्ष 2018 से 2024 तक आयुष्मान योजना के तहत इम्पैनल किए गए अस्पतालों का निरीक्षण किया। जांच में कई अस्पताल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। कुछ अस्पतालों में बिना वैध पंजीकरण के संचालन, चिकित्सकों की अनुपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी पाई गई, जिन अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, उनमें सेहर मेमोरियल हॉस्पिटल (निघुरी बाजार), न्यू केयर हॉस्पिटल (मेंहदावल बाईपास), न्यू मेडविन हॉस्पिटल (गोरखर देहात), मुनमुन क्लीनिक एंड मेटरनिटी हॉस्पिटल (बंगला ताल चौराहा), बालाजी हॉस्पिटल (बाईपास खलीलाबाद), जीवन रेखा हॉस्पिटल (बौर-ब्यास, मेंहदावल), सन्स हॉस्पिटल (टेमा रहमत), एम. गोल्ड हॉस्पिटल, केयर हॉस्पिटल (समय माता मंदिर के पीछे, खलीलाबाद) तथा ओम साई हॉस्पिटल (जिला अस्पताल के निकट) शामिल हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया ने बताया कि आयुष्मान योजना में इम्पैनल 37 अस्पतालों में से चार को अब तक कोई दावा भुगतान नहीं हुआ है। जबकि शेष 33 अस्पतालों में रजत हॉस्पिटल, एसआर हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल, शम्भूनाथ मेमोरियल हॉस्पिटल, पटेल हॉस्पिटल और स्पर्श हॉस्पिटल को सर्वाधिक दावे एवं भुगतान प्राप्त हुए हैं। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इन अस्पतालों के दावों और भुगतान की पुनः जांच अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीम से कराने के निर्देश दिए। साथ ही सभी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर के लिए डी-फाइब्रिलेटर, फायर सेफ्टी व्यवस्था तथा कम से कम दो आपात निकास (इमरजेंसी एग्जिट) दो सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो अस्पताल आयुष्मान योजना के इम्पैनलमेंट के निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें डी-इम्पैनल करने की कार्रवाई की जाएगी।


