गैस एजेंसी की जमीन पर रास्ते की चर्चा से गरमाई राजनीति, प्रशासन ने कराया सीमांकन

- दिन भर चर्चा में रहीं शोहरतगढ़ में गैस एजेंसी के रास्ते की राजनीति, घंटों चला सीमांकन।
असदुल्लाह सिद्दीकी
शोहरतगढ़/सिद्धार्थनगर।नगर पंचायत शोहरतगढ़ में एक कथित रास्ता विवाद को लेकर तहसील प्रशासन को करीब साढ़े 6 घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं चर्चाओं के मुताबिक शोहरतगढ़ विधानसभा के एक बड़े नेता को मुख्य मार्ग यानी खुनुवां बाईपास रोड से गैस एजेंसी के रास्ते उनके भविष्य के आवासीय प्लॉट तक मार्ग दिलाने को लेकर प्रशासनिक अमला सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक मौके पर जुटा रहा। करीब 06 घंटे चली पैमाइश और सीमांकन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट माना कि किसी अन्य व्यक्ति की निजी सम्पत्ति से अवैध अथवा अनाधिकृत रास्ता नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित भूमि पर उसी व्यक्ति का वैध कब्जा माना जायेगा, जिसकी सम्पत्ति है। सीमांकन के बाद जेसीबी मशीन बुलाकर गड्ढा भी खुदवाया गया, ताकि जमीन का स्पष्ट बंटवारा किया जा सके। आपको बता दें कि राजा योगेन्द्र प्रताप सिंह के पैरोकार के रूप में राजू रावत ने भी राजा की भूमि तक जाने के लिए लगभग 18.5 फीट चौड़ा मार्ग चिन्हित करवा लिया। हालांकि मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों के बीच देर शाम तक यह चर्चा बनी रही कि आखिर वास्तविक विवाद किसके बीच और किस बात को लेकर था। यह रहस्य शाम 5 बजे तक भी कायम रहा। चर्चाओं के मुताबिक जिस जमीन की करीब 6 घंटे तक पैमाइश की गई, उसके सम्बन्ध में कोई लिखित आदेश भी मौजूद नहीं था। आरोप यह भी लगे कि तहसील प्रशासन किसी बड़े नेता के दबाव में मौखिक निर्देश पर कार्रवाई करने पहुंचा था। चर्चाओं द्वारा उक्त कथित विवाद शोहरतगढ़ स्थित राजा योगेन्द्र प्रताप सिंह के प्लॉट तक पहुंच मार्ग को लेकर था, जिसमें कस्बा निवासी रामदेव यादव की भूमि तथा उत्तमा सोनी एचपी गैस ग्रामीण वितरण केन्द्र संचालक राजेश कुमार आर्या की बैनामा शुदा जमीन शामिल थी। आरोप है कि जब गैस एजेंसी संचालक राजेश आर्या अपनी बैनामा शुदा भूमि पर गेट निर्माण करवा रहे थे, तभी तहसील प्रशासन ने निर्माण कार्य रुकवा दिया और अगले दिन मौके पर पैमाइश के लिए पहुंच गया। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, न तो किसी पक्ष ने औपचारिक शिकायत की थी और न ही सीमांकन की कोई मांग की गई थी। लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि एक बड़े राजनीतिक प्रभाव वाले व्यक्ति को उक्त जमीन से अपने प्लॉट तक रास्ता चाहिए था, जिसके लिए एजेंसी संचालक तैयार नहीं थे। आरोप है कि प्रशासनिक दबाव में उनकी निजी भूमि से सार्वजनिक मार्ग निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की उपस्थिति में यह प्रयास सफल नहीं हो सका। अन्ततः तहसील प्रशासन ने कथित रूप से संबंधित तीनों पक्षों की भूमि का सीमांकन कर मामले का निस्तारण कराया। इस पूरी प्रक्रिया में हल्का लेखपाल, राजस्व निरीक्षक सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को करीब 6 घंटे का समय लगा। एसडीएम द्वारा मामले के निस्तारण के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें न्यायपूर्ण निर्णय के लिए धन्यवाद भी दिया। तहसील और थाना प्रशासन की मौजूदगी में विवाद समाप्त करा दिया गया। इस दौरान एसडीएम विवेकानन्द मिश्रा, तहसीलदार प्रकाश सिंह यादव, नायब तहसीलदार माधुर्य यादव, राजस्व निरीक्षक अवधेश सिंह, राजस्व निरीक्षक नवनीत नागर, लेखपाल सन्तोष शुक्ला, लेखपाल मोहित सिंह, प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष डॉ0 पवन मिश्रा, चेयरमैन प्रतिनिधि रवि अग्रवाल, अभय प्रताप सिंह, सौरभ गुप्ता, संजय कसौधन, सतीश खेतान, बबलू गौड़, दिलीप वर्मा, मनोज कुमार गुप्ता, अनूप गोस्वामी, रमेश वर्मा, सांसद प्रभारी सूर्य प्रकाश पाण्डेय सहित उप निरीक्षक रामबदन यादव, हेड कांस्टेबल दिनेश यादव, हेड कांस्टेबल प्रभाकर यादव आदि मौजूद रहे।




