300 साल पुराना नाम बदलने की राह पर बहरामपुर अकबरपुर, नगर निगम बोर्ड ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

गाजियाबाद। गाजियाबाद के करीब 300 वर्ष पुराने गांव बहरामपुर अकबरपुर का नाम अब बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में गांव का नाम बदलकर केवल बहरामपुर किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए नामकरण समिति के पास भेजा जाएगा। समिति की मंजूरी मिलने के बाद गांव की पहचान आधिकारिक रूप से नए नाम के साथ स्थापित हो जाएगी। गाजियाबाद के विजय नगर जोन के वार्ड-35 में स्थित बहरामपुर अकबरपुर का इतिहास 18वीं शताब्दी के मध्य से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि मुगल साम्राज्य के वजीर गाजी-उद-दीन द्वारा गाजियाबाद की स्थापना के दौर में यह क्षेत्र एक कृषि प्रधान ग्रामीण बस्ती के रूप में विकसित हुआ था। समय के साथ यह गांव तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ा और आज सिद्धार्थ विहार तथा प्रताप विहार जैसे विकसित आवासीय क्षेत्रों से सटा हुआ एक प्रमुख रिहायशी केंद्र बन चुका है। वर्तमान में करीब 40 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में अधिकांश निवासी हिंदू समुदाय से संबंधित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के नाम को लेकर लंबे समय से असंतोष और नाम परिवर्तन की मांग उठती रही है। पिछले कई वर्षों में क्षेत्र के नागरिकों ने पत्राचार, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से इस मुद्दे को लगातार उठाया। इसी मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने नगर निगम को पत्र लिखकर गांव का नाम बदलने की मांग का समर्थन किया था। पत्र में स्थानीय लोगों की भावनाओं का उल्लेख करते हुए नाम परिवर्तन पर विचार करने का आग्रह किया गया था। इसके बाद मामला नगर निगम बोर्ड बैठक में लाया गया, जहां प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दे दी गई। अब यह प्रस्ताव नामकरण समिति के समक्ष रखा जाएगा। समिति ऐतिहासिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अपनी संस्तुति देगी। यदि समिति अंतिम स्वीकृति प्रदान करती है तो भविष्य में बहरामपुर अकबरपुर को आधिकारिक रूप से केवल बहरामपुर के नाम से जाना जाएगा। नामकरण समिति के सदस्य प्रवीण चौधरी ने बताया कि हाल ही में हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में 30 से अधिक नामकरण और नाम परिवर्तन संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें विभिन्न सड़कों, पार्कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों के नाम निर्धारित करने या बदलने के प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नामकरण समिति किसी भी स्थान का नाम तय करते समय उसके ऐतिहासिक महत्व, सामाजिक स्वीकार्यता और राष्ट्रीय योगदान जैसे पहलुओं पर विचार करती है। विशेष रूप से देश के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, स्वतंत्रता सेनानियों और सेना के वीर जवानों के नामों को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि आने वाली पीढिय़ां उनके योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।



