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22.55 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, छात्र गिरफ्तार

_छह बैंक खातों से देशभर में ठगी का कनेक्शन

वेलकम इण्डिया/संवाददाता

सिद्धार्थनगर। खेसरहा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक छात्र को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 17 साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा मिला है। पुलिस जांच में करीब 22 करोड़ 55 लाख 91 हजार 598 रुपये की संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन श्रृंखला सामने आई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि यह पूरी धनराशि आरोपी के खातों में नहीं आई थी, बल्कि जांच में उसके खातों में कुल 61,146.66 रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े लेनदेन की पुष्टि हुई है। मामले में पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘साइ-वज्र’ अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में खेसरहा थाना पुलिस और साइबर सेल ने एनसीआरपी व समन्वय पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच की। जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान आरोपी के एक म्यूल खाते से जुड़े नौ साइबर फ्रॉड मामलों में 15.47 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता चला, जिनमें से 24,230.66 रुपये आरोपी के खाते में पहुंचे थे। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी नसीम अहमद (20) पुत्र औसाफ अहमद, निवासी बेलवालगुनही, थाना खेसरहा ने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर साइबर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में मंगवाता था। इसके बाद उसी धनराशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजता था। इस उद्देश्य से उसने यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और इंडियन पोस्ट पेमेंट्स बैंक में अपने नाम से छह बैंक खाते खुलवा रखे थे। जांच के दौरान उसके तीन अन्य खातों के खिलाफ आठ और साइबर शिकायतें सामने आईं, जिनमें 7.08 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी दर्ज मिली। इनमें से 36,916 रुपये आरोपी के खातों में आने की पुष्टि हुई। इस प्रकार उसके खातों का संबंध कुल 17 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ गया।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक आईफोन, एक वीवो मोबाइल, एचपी कंपनी का लैपटॉप, 20 हजार रुपये नकद, चार बैंक पासबुक, पांच एटीएम कार्ड तथा अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग विवरण किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसे बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट के रूप में करते हैं और इसमें संलिप्त पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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