ग़ाज़ियाबाद

सात फ्लैटों के नाम पर लिए 1.36 करोड़, बैनामा किसी और के नाम; बिल्डर के तीन निदेशकों पर मुकदमा 

गाजियाबाद। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में सात फ्लैटों के नाम पर करीब 1.36 करोड़ रुपये लेने और बाद में उन्हीं फ्लैटों को दूसरे लोगों को बेचने का मामला सामने आया है। फरीदाबाद निवासी बुजुर्ग की शिकायत पर पुलिस ने नंदिनी बिल्डहोम कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पीडि़त का आरोप है कि वर्ष 2018 में भारी छूट का झांसा देकर उनसे सात फ्लैटों की पूरी रकम ले ली गई और उन्हें आवंटन पत्र तथा नो-ड्यूज प्रमाणपत्र भी दिए गए, लेकिन बाद में पता चला कि फ्लैट दूसरे लोगों को बेच दिए गए हैं। फरीदाबाद के सेक्टर-16ए निवासी सतीश कुमार गुप्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वसुंधरा सेक्टर-15 स्थित द वसुंधरा ग्रैंड का निर्माण नंदिनी बिल्डहोम कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड ने कराया है। वर्ष 2018 में कंपनी के निदेशक सुधीर कुमार राय, रोहित अग्रवाल और गौरव गुप्ता ने उनसे संपर्क किया था। आरोप है कि निदेशकों ने कंपनी में धन की कमी बताते हुए भारी छूट पर एकमुश्त सात फ्लैट खरीदने का प्रस्ताव दिया।
सतीश कुमार गुप्ता के अनुसार, भरोसा होने पर उन्होंने जुलाई 2018 में सातों फ्लैट बुक कर लिए और अगस्त 2018 में करीब 1.36 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद कंपनी की ओर से उन्हें सातों फ्लैटों के अलग-अलग आवंटन पत्र और नो-ड्यूज प्रमाणपत्र भी दे दिए गए। बैनामा के संबंध में उन्हें रेरा पंजीकरण और अन्य कागजी प्रक्रिया पूरी होने का हवाला दिया गया। पीडि़त के मुताबिक काफी समय बीतने के बाद भी बैनामा नहीं हुआ तो वह हाल ही में द वसुंधरा ग्रैंड पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि जिन सात फ्लैटों को उन्होंने खरीदा था, उनमें दूसरे परिवार रह रहे थे। पूछताछ करने पर उन्हें जानकारी मिली कि विकासकर्ता ने ये फ्लैट अन्य लोगों को बेच दिए हैं। इसके बाद उन्होंने निदेशक सुधीर कुमार राय से संपर्क करने का प्रयास किया। आरोप है कि फोन पर बात करने से इनकार करने के साथ उनके साथ अभद्रता भी की गई। सहायक पुलिस आयुक्त इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि शिकायत के आधार पर नंदिनी बिल्डहोम कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड और उसके तीनों निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, कंपनी के निदेशक सुधीर कुमार राय ने आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि आवंटियों की ओर से भुगतान नहीं किए जाने के कारण परियोजना के निर्माण में देरी हुई थी। इसके बाद परियोजना रेरा के दायरे में चली गई। उनका कहना है कि रेरा में सुनवाई के बाद बकायेदार आवंटियों के भुगतान में 10 प्रतिशत कटौती कर शेष राशि लौटाने और फ्लैट बेचकर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। इसी आदेश के तहत सतीश कुमार गुप्ता समेत अन्य बकायेदारों को रिफंड की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। निदेशक के मुताबिक रेरा के आदेश के आधार पर फ्लैट बेचकर परियोजना पूरी की गई है और इस संबंध में पुलिस को सभी संबंधित साक्ष्य उपलब्ध करा दिए गए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button