जनता दरबार में पूरी हुई उम्मीदें, डीएम ने दिव्यांग क्रिकेटर को सौंपी किट

गाजियाबाद। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांडड़ का जनता दरबार जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है। यहां अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे लोगों को राहत मिलने से उनके चेहरों पर खुशी लौट रही है। हाल ही में जनता दरबार में पहुंचे दिव्यांग क्रिकेटर राजा बाबू को क्रिकेट किट उपलब्ध कराई गई, वहीं लोनी निवासी वृद्ध विधवा सुशीला देवी को पेंशन, अंत्योदय कार्ड और आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन की सुविधा मिली। बुधवार को दोनों ने जिलाधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया। दिव्यांग क्रिकेटर राजा बाबू ने कुछ सप्ताह पहले जनता दरबार में जिलाधिकारी को अपनी परेशानी बताई थी। उन्होंने बताया कि वह भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। मूल रूप से जालौन निवासी राजा बाबू पिछले 15 वर्षों से बहरामपुर, प्रताप विहार में रह रहे हैं। करीब दो वर्ष पहले यात्रा के दौरान ट्रेन में उनकी क्रिकेट किट चोरी हो गई थी। किट नहीं होने के कारण उन्हें अभ्यास और खेल के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
राजा बाबू ने जिलाधिकारी से क्रिकेट किट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मानवीय संवेदनाओं के साथ उनकी मदद करने के निर्देश दिए। बुधवार को राजा बाबू को क्रिकेट किट सौंपी गई। किट मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए जिलाधिकारी से अपने बैट पर ऑटोग्राफ देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी उनके लिए रियल हीरो हैं, जो जरूरतमंदों की सहायता और लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने उनका आग्रह स्वीकार करते हुए बैट पर ऑटोग्राफ भी दिया।
जनता दरबार में कुछ सप्ताह पहले लोनी निवासी वृद्ध विधवा सुशीला देवी भी अपनी परेशानी लेकर पहुंची थीं। उन्होंने बताया था कि उनके पति का वर्षों पहले निधन हो चुका है और उनके दोनों बेटे पिछले आठ-दस वर्षों से उनके साथ नहीं रहते। अकेले जीवन गुजार रहीं सुशीला देवी के पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है। उनकी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने पेंशन, अंत्योदय कार्ड और आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन कराने के निर्देश दिए। बुधवार को सुशीला देवी ने पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी का आभार जताया और उनके सुखी जीवन व तरक्की की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की मदद से उन्हें सहारा मिला है और अब वह सम्मान के साथ जीवन जी पा रही हैं। साथ ही उन्होंने अपनी एक और समस्या रखते हुए बताया कि उनके घर में पिछले दो वर्षों से बिजली नहीं है, लेकिन हर महीने बिल आ रहा है। उन्होंने बिजली बिल माफ कराने और घर में बिजली उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। सुशीला देवी ने भरोसा दिलाया कि आगे आने वाला बिजली बिल वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार जमा करती रहेंगी। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांडड़ ने जरूरतमंदों की समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सहायता के निर्देश दिए। इन मामलों में मिली राहत से स्पष्ट है कि समय पर सुनवाई और संवेदनशील पहल लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। अब सुशीला देवी को बिजली बिल माफ होने और घर में बिजली आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।



