ग़ाज़ियाबाद

स्वच्छ हवा की दिशा में निगम ष्ट्रीय स्तर पर गाजियाबाद टॉप-10 में

-स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नगर निगम को मिली नौवीं रैंक, तीन साल में 18वें से नौवें स्थान पर पहुंचा शहर
-15 एंटी स्मॉग गन, 32 वाटर स्प्रिंकलर और 12 रोड स्वीपिंग मशीनों से धूल व प्रदूषण पर प्रहार
-वृहद पौधारोपण अभियान के तहत इस वर्ष करीब सात लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, यूपी में तीसरा स्थान

गाजियाबाद। वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे लगातार प्रयासों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है। गाजियाबाद नगर निगम ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इस बार नौवीं रैंक हासिल कर टॉप-10 में जगह बनाई है। तीन वर्षों में निगम की रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2024 में गाजियाबाद को 18वीं रैंक मिली थी, जो 2025 में सुधरकर 12वीं और इस बार 2026 में नौवीं हो गई है। उत्तर प्रदेश में नगर निगम को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में स्वास्थ्य, जलकल, उद्यान और निर्माण विभाग संयुक्त रूप से वायु गुणवत्ता सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं। सड़कों को धूल मुक्त बनाने, नियमित पानी का छिड़काव करने, सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने और धूल उडऩे वाले स्थानों पर स्थायी निर्माण कराने जैसे कदमों से शहर की हवा में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। वायु गुणवत्ता सुधार में उद्यान विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2024 में शासन की ओर से दिए गए लक्ष्य के तहत निगम ने 1.44 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर डेढ़ लाख से अधिक हो गई। इस वर्ष निगम ने पौधारोपण अभियान को और व्यापक बनाने की तैयारी की है। उपवन योजना और अन्य योजनाओं के तहत निगम की खाली जमीनों तथा आर्मी लैंड पर करीब सात लाख पौधे लगाने का कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर पौधारोपण से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ेगा और आने वाले समय में वायु गुणवत्ता में और सुधार होगा। पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य और जलकल विभाग की ओर से शहर की प्रमुख सड़कों और धूल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए निगम 15 आधुनिक एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल कर रहा है। इन उपकरणों के माध्यम से हवा में मौजूद धूल के कणों को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा निगम के पास 32 वाटर स्प्रिंकलर हैं, जिनसे सड़कों, डिवाइडरों, पेड़-पौधों और खुले क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी और शुष्क मौसम के दौरान धूल उडऩे की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में नियमित छिड़काव से प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहायता मिलती है। सड़कों की सफाई के लिए 12 रोड स्वीपिंग मशीनें भी लगाई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से सड़कों पर जमा धूल और मिट्टी को हटाया जा रहा है। निगम का दावा है कि आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई है और सफाई कर्मचारियों को भी बेहतर संसाधन उपलब्ध हुए हैं।
निर्माण विभाग ने धूल उडऩे वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां इंटरलॉकिंग और सड़क निर्माण का कार्य कराया है। एंड-टू-एंड पेविंग के तहत अब तक करीब 49 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में इंटरलॉकिंग लगाई जा चुकी है। इससे कच्चे किनारों और खुले स्थानों से उडऩे वाली धूल पर रोक लगाने में मदद मिली है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन, खुले डिवाइडर और निर्माण सामग्री वाले स्थानों से बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है। ऐसे स्थानों पर स्थायी निर्माण और इंटरलॉकिंग कराने से वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ शहर की सुंदरता भी बढ़ रही है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि वायु गुणवत्ता सुधार के लिए निगम की टीम लगातार धरातल पर काम कर रही है। शहरवासियों का सहयोग भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पानी का छिड़काव, सड़क सफाई, धूल नियंत्रण और पौधारोपण जैसे कार्यों को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि आने वाले सर्वेक्षण में गाजियाबाद की रैंकिंग और बेहतर हो सके। महापौर सुनीता दयाल ने नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और शहरवासियों को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों के उपयोग, विभागों के समन्वय और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण गाजियाबाद राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-10 में शामिल हुआ है। नगर निगम का लक्ष्य शहर को स्वच्छ, हरा-भरा और बेहतर वायु गुणवत्ता वाला बनाना है।

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