बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी पर चलेगा सख्ती का चाबुक, श्रमिकों के पंजीकरण में तेजी लाने के निर्देश

गाजियाबाद। जिले में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी पर प्रभावी रोक लगाने के साथ श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में जिला श्रम बंधु, बाल श्रम उन्मूलन जनपद समिति, जिला टास्क फोर्स और जनपद स्तरीय बंधुआ श्रम सतर्कता समिति की बैठक हुई। इसमें निर्माण श्रमिकों के शत-प्रतिशत पंजीकरण, बाल श्रम के खिलाफ अभियान तेज करने और बंधुआ श्रम से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने पर जोर दिया गया। जिला श्रम बंधु की बैठक में सीडीओ ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की कुल लागत से काटे गए एक प्रतिशत उपकर (सेस) का विवरण निर्धारित प्रारूप में श्रम विभाग को उपलब्ध कराएं। साथ ही, सभी निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिल सके। उप श्रम आयुक्त ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 2165 प्रतिष्ठानों का पंजीकरण और 7486 श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 272 श्रमिकों को कुल 78,69,318 रुपये का लाभ दिया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत 414 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। सीडीओ ने उप श्रम आयुक्त और सहायक श्रम आयुक्त को निर्देश दिए कि प्रत्येक माह का रोस्टर तैयार कर निर्माणाधीन स्थलों पर शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से श्रमिकों का पंजीकरण कराने के साथ योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जाए। उद्यमी संगठनों और ट्रेड यूनियनों से भी श्रमिकों को जागरूक करने की अपेक्षा की गई। बाल श्रम उन्मूलन समिति और जिला टास्क फोर्स की बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाल श्रम से संबंधित 95 निरीक्षण किए गए। इनमें कुल 104 किशोर श्रमिक चिह्नित किए गए। बाल एवं किशोर श्रमिकों को नियोजित करने वाले 66 सेवायोजकों के खिलाफ न्यायालय में अभियोजन दायर किया गया है। इनमें से 11 सेवायोजकों पर न्यायालय ने कुल 27,500 रुपये का जुर्माना लगाया है। सीडीओ ने बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में सघन अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिह्नित बाल श्रमिकों के परिवारों की आर्थिक स्थिति और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। संबंधित विभागों को इन बच्चों और उनके परिवारों की सूची भेजकर उन्हें पात्र सरकारी योजनाओं से जोडऩे तथा आर्थिक एवं शैक्षिक पुनर्वासन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जनपद स्तरीय बंधुआ श्रम सतर्कता समिति की बैठक में बताया गया कि जिले में बंधुआ श्रम से संबंधित 20 समरी ट्रायल वाद निर्णय के लिए लंबित हैं। इनमें मोदीनगर तहसील के 16, सदर तहसील के तीन और लोनी तहसील का एक मामला शामिल है। सीडीओ ने सहायक श्रम आयुक्त और श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को संबंधित उपजिलाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि जिले में बंधुआ श्रम कराए जाने से जुड़े मामलों पर कड़ी नजर रखी जाए। ऐसा कोई भी प्रकरण सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।


