देवहा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांव पर खतरा, कटान के डर से पलायन को मजबूर ग्रामीण

किसानों की धान-गन्ने की फसलें बर्बाद, राहत और बचाव व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग
वेलकम इंडिया पीलीभीत
पीलीभीत। तेज हवाओं के साथ तीन दिनों से हो रही भारी बारिश और बांधों से नदियों में छोड़े जा रहे पानी के चलते शारदा, देवहा सहित अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। धान और गन्ने की फसलें प्रभावित होने के साथ कृषि भूमि और आबादी को भी नदी के कटान का खतरा बना हुआ है। नावकूड़ गांव के नजदीक नदी पहुंचने से ग्रामीणों की धुकधुकी बढ़ गई है। कटान की चपेट में आने की आशंका को लेकर ग्रामीण घर से पलायन कर रहे हैं। मामले की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। किसान नेता एवं प्रांतीय संरक्षक क्रांतिकारी विचार मंच उत्तर प्रदेश देवस्वरूप पटेल ने बाढ़ नियंत्रण एवं राहत प्रभारी अपर जिलाधिकारी राजस्व एवं वित्त से वार्ता कर बाढ़ चौकियों और रैन बसेरों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह स्वयं संगठन के साथियों के माध्यम से नदी कटान प्रभावित गांवों के ग्रामीणों के लगातार संपर्क में हैं और लोगों से प्रशासनिक टीमों का सहयोग करने की अपील की जा रही है।देवस्वरूप पटेल ने बताया कि अहिरवाड़ा, कांधरपुर, रसूला, गुदरानपुर, बहादुरपुर हुकुमी, सुस्वार, सैजना, पियास, नावकुड़ और वेहरी समेत कई गांवों में देवहा नदी के कटान से नुकसान की स्थिति बन रही है। ग्रामीणों ने दूरभाष पर उन्हें बताया कि अभी तक कई स्थानों पर प्रशासनिक कर्मचारी या अधिकारी नहीं पहुंचे हैं, जिससे प्रभावित लोगों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी में पानी लगातार बढ़ रहा है।पटेल ने ग्रामीणों की समस्याओं से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पीलीभीत सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एक दिन पहले जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए थे। उन्होंने बाढ़ की मौजूदा स्थिति और ग्रामीणों की समस्याओं से केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद को भी अवगत कराया है।


