डीएम की जनसुनवाई में अंजलि को बच्चों समेत मिला आशियाना

गाजियाबाद। जिले में जनसुनवाई जरूरतमंदों और पीडि़तों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना गया। भूमि विवाद, अवैध कब्जे, संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। प्रशासन का जोर शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय पीडि़तों को वास्तविक राहत दिलाने पर है। जनसुनवाई में पहुंचे फरियादियों ने अपनी समस्याएं बताते हुए न्याय की गुहार लगाई। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत की गंभीरता से जांच कर निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। गरीब, असहाय, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं सहित जरूरतमंद पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में प्राथमिकता बरती जाए। कई मामलों में मौके पर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जनसुनवाई में मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण अंजलि पत्नी स्वर्गीय अशोक कुमार का मामला रहा। अंजलि के अनुसार, वर्ष 2020 में उन्हें ससुराल पक्ष की ओर से चार बच्चों सहित घर से बेघर कर दिया गया था। वह लंबे समय से बच्चों के साथ अपने घर लौटने की उम्मीद लगाए हुए थीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। कुछ दिन पहले उन्होंने डीएम की जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा बताई। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की, जिसके बाद अंजलि को ससुराल पक्ष की ओर से मकान उपलब्ध कराया गया। घर मिलने से राहत महसूस कर रही अंजलि ने जिलाधिकारी और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की मदद से उन्हें और उनके बच्चों को छत मिल सकी है। लाजपत नगर, साहिबाबाद निवासी मान्यता सदनकूल ने 16 सितंबर 2026 को डीएम के समक्ष शिकायत रखी थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक फ्लैट खरीदा था और उसमें रह रही थीं। बाद में बैंक की ओर से सीलिंग संबंधी नोटिस मिलने पर पता चला कि जिस व्यक्ति से फ्लैट खरीदा था, वह उसका वास्तविक मालिक नहीं था। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने फ्लैट के नाम पर उनसे साढ़े नौ लाख रुपये लिए थे, लेकिन रकम वापस नहीं की जा रही थी। डीएम ने मामले में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मान्यता को दो लाख रुपये वापस मिल चुके हैं। शेष साढ़े सात लाख रुपये भी इसी माह लौटाने का संबंधित व्यक्ति ने आश्वासन दिया है। मान्यता ने प्रशासन की पहल पर आभार जताते हुए लोगों से अपनी समस्याएं सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखने की अपील की। जनसुनवाई में पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य सरकारी योजनाओं से संबंधित शिकायतें भी सामने आईं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ लाभान्वित करने की कार्रवाई की जाए। जरूरतमंदों को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने और रोजगार के अवसरों से जोडऩे जैसे मामलों में भी संबंधित विभागों को सक्रिय रहने को कहा गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए और कार्रवाई की गुणवत्ता की समीक्षा भी की जानी चाहिए। जनसुनवाई में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), अपर जिलाधिकारी (नगर), जिला सूचना अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


