ग़ाज़ियाबाद

जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अभिनव पहल से दिव्यांगजनों को मिला सम्मानजनक स्वरोजगार, चलती-फिरती दुकान बनकर बदलेगी जिंदगी-विधायक अजीत पाल त्यागी ने किया शुभारंभ, 50 लाभार्थियों की ट्राइसाइकिलों को मोबाइल शॉप में किया गया विकसित

गाजियाबाद। दिव्यांगजनों को सहायता के बजाय सम्मानजनक आजीविका और स्थायी स्वरोजगार से जोडऩे की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अभिनव और प्रेरणादायी पहल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ एवं मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ के विशेष प्रयासों से शुरू किए गए ‘मिशन समर्थÓ के तहत मोटराइज्ड ट्राइसाइकिलों को चलती-फिरती दुकानों (मोबाइल शॉप) में परिवर्तित कर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस पहल से लाभार्थी अब अपने घर के आसपास अथवा शहर के विभिन्न स्थानों पर स्वयं का छोटा व्यवसाय संचालित कर सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित कर सकेंगे।
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजीत पाल त्यागी, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ तथा मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने संयुक्त रूप से शुक्रवार को रिबन काटकर इस अभिनव योजना का शुभारंभ किया और लाभार्थियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान, नींव शक्ति संस्था की संस्थापक ऋचा वल्लभ खुल्बाई, मोहन मिकीन लिमिटेड के प्रतिनिधि विशाल, ए.डी. सैनी सहित अनेक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अजीत पाल त्यागी ने कहा कि यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने की दिशा में एक प्रेरणादायी मॉडल है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को अपने परिश्रम से आगे बढऩे का अवसर मिलता है, तभी वह वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनता है। सरकार दिव्यांगजनों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को स्थायी स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाना है। उन्होंने कहा कि मिशन समर्थ गाजियाबाद में दिव्यांगजन सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभरेगा और भविष्य में अधिकाधिक दिव्यांगजनों को इस योजना से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन अपने पैरों पर खड़ा हो सके और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ उसे प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि रोजगार आधारित योजनाएं ही सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और इसी सोच के साथ मिशन समर्थ को धरातल पर उतारा गया है। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने बताया कि मार्च माह में जनपद के 106 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिलें उपलब्ध कराई गई थीं। उसी क्रम में प्रथम चरण में लगभग 50 लाभार्थियों की ट्राइसाइकिलों को विशेष रूप से अनुकूलित कर उन्हें मोबाइल दुकानों के रूप में विकसित किया गया है। प्रत्येक ट्राइसाइकिल पर मजबूत विक्रय ढांचा तैयार किया गया है तथा प्रारंभिक व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक विक्रय सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लाभार्थी बिना अतिरिक्त निवेश के अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने में मोहन मिकीन लिमिटेड, मोहन नगर द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत पांच लाख रुपये का आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। प्रत्येक मोबाइल दुकान तैयार करने में लगभग दस हजार रुपये की लागत आई, जिसमें विशेष संरचना तैयार करने और प्रारंभिक विक्रय सामग्री उपलब्ध कराने पर राशि व्यय की गई। नींव शक्ति संस्था की संस्थापक ऋचा वल्लभ खुल्बाई ने बताया कि जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में संस्था ने लाभार्थियों के चयन, ट्राइसाइकिलों के अनुकूलन, विक्रय सामग्री की व्यवस्था तथा व्यवसाय प्रारंभ कराने तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन, सामाजिक संस्था और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों ने इस योजना को सफल बनाया है। इस परियोजना में सामाजिक भागीदारी का भी प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला। इंग्राहम इंग्लिश मीडियम स्कूल के लगभग 20 छात्र-छात्राओं ने स्वयंसेवक के रूप में विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग देकर सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर नींव शक्ति संस्था की टीम तथा विद्यालय के स्वयंसेवी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। लाभार्थियों ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पहले से पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था, लेकिन अब चलती-फिरती दुकान मिलने से उनके जीवन में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण स्वयं कर सकेंगे और सम्मान के साथ जीवन जीने का सपना साकार होगा।

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