कानून की पढ़ाई में मजबूत तर्कों की बुनियाद है सटीक रिसर्च, एसजीयू में विद्यार्थियों को सिखाए गुर-अकादमिक ईमानदारी और मौलिक लेखन का महत्व समझाते हुए नकल से बचने की दी सलाह

गाजियाबाद। कानून की पढ़ाई केवल कानूनी धाराओं और अदालती फैसलों को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी कानूनी मुद्दे पर मजबूत पक्ष रखने के लिए सटीक और तथ्यपरक शोध करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से एसजीयू के स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज की ओर से विद्यार्थियों के लिए ‘इंट्रोडक्शन टू लीगल रिसर्च मेथड्सÓ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर आलोक शर्मा ने विद्यार्थियों को कानूनी शोध की बारीकियों और उसके व्यावहारिक महत्व से परिचित कराया। कार्यक्रम का समन्वय स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज की सहायक प्रोफेसर डॉ. उर्मिला देवी ने किया। व्याख्यान में प्रोफेसर आलोक शर्मा ने बताया कि कानूनी शोध किसी भी कानूनी विषय को गहराई से समझने, तथ्यों की जांच करने और सही निष्कर्ष तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉक्ट्रिनल और नॉन-डॉक्ट्रिनल रिसर्च के बीच अंतर समझाते हुए दोनों शोध पद्धतियों के उपयोग और विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कानूनी शोध के लिए कानून की पुस्तकों, न्यायालयों के फैसलों, कानूनी वेबसाइटों, शोध पत्रों और अन्य प्रामाणिक स्रोतों का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी विषय पर शोध करते समय केवल जानकारी जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तथ्यों को समझकर उनका तार्किक विश्लेषण करना भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को सही स्रोतों से सामग्री लेने और शोध में प्रमाणिकता बनाए रखने के तरीके बताए। प्रोफेसर आलोक शर्मा ने अकादमिक ईमानदारी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शोध कार्य में मौलिकता का होना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को दूसरे के लेखन या शोध को अपना बताने से बचना चाहिए और इस्तेमाल किए गए स्रोतों का उचित उल्लेख करना चाहिए। उन्होंने प्लेजरिज्म यानी साहित्यिक चोरी के नुकसान बताते हुए जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ शोध करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रभावी कानूनी रिसर्च से विद्यार्थियों को न्यायालयों के फैसलों को बेहतर ढंग से समझने, कानूनी मुद्दों पर मजबूत तर्क प्रस्तुत करने और अपने पक्ष को प्रमाणों के साथ रखने में मदद मिलती है। इसका लाभ उन्हें असाइनमेंट, शोध परियोजनाओं और मूट कोर्ट की तैयारी में भी मिलेगा। विश्वविद्यालय के चेयरमैन एवं चांसलर महेंद्र अग्रवाल, वाइस चेयरमैन अखिल अग्रवाल, प्रो-चांसलर नितिन अग्रवाल, प्रो-चांसलर (शैक्षणिक) विमल कुमार शर्मा, प्रो-चांसलर (प्रशासन) पीयूष श्रीवास्तव और वाइस चांसलर प्रो. डॉ. प्रसेनजीत कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।



