यम द्वितीया मेले के राजकीय दर्जे की राह हुई आसान, परशुराम द्वार का प्रस्ताव भी पास

मथुरा। विश्व प्रसिद्ध मथुरा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंगलवार को नगर निगम की बैठक में पारित किए गए। वार्ड संख्या 56 की पार्षद नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज की पहल पर विश्व प्रसिद्ध यम द्वितीया मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिलाने तथा मिलन तिराहे (द्वारका पेड़े वाले मार्ग) का नाम भगवान परशुराम द्वार किए जाने का प्रस्ताव सदन में रखा गया।
यम द्वितीया मेला मथुरा की प्राचीन धार्मिक परंपरा का प्रमुख आयोजन है। इस अवसर पर विश्राम घाट सहित यमुना के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालु भाई-बहन स्नान करने पहुंचते हैं। मेले के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इसे राजकीय दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। यमुना महारानी आरती मुकुट मंडल समिति के महामंत्री शरद चतुर्वेदी ने इसी वर्ष 13 अप्रैल को इस संबंध में पत्र लिखा था। इसके बाद पार्षद ने 15 अप्रैल को नगर आयुक्त को प्रस्ताव सौंपा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने भी 22 मई को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था। अब नगर निगम में प्रस्ताव पारित होने के बाद अंतिम निर्णय शासन स्तर से होना है।
वहीं, मिलन तिराहे का नाम भगवान परशुराम द्वार किए जाने के प्रस्ताव पर भगवान परशुराम शोभायात्रा समिति एवं श्री वामन भगवान महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने पार्षद का आभार जताया। समिति के संस्थापक श्याम शर्मा और कार्यकारिणी अध्यक्ष संजय हरियाणा ने कहा कि यह नामकरण क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने वाला कदम है। उन्होंने नामकरण की शेष औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कराने की अपेक्षा जताई।


