ग़ाज़ियाबाद

अवैध कॉलोनाइजरों पर जीडीए का बुलडोजर, कनौजा से मुरादनगर तक 32 हजार वर्गमीटर में ध्वस्तीकरण-बिना स्वीकृत मानचित्र और वैध दस्तावेज के हो रही प्लाटिंग पर प्राधिकरण की सख्त कार्रवाई

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने शुक्रवार को अवैध निर्माण एवं अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम कनौजा और मुरादनगर क्षेत्र में व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। प्रभारी प्रवर्तन जोन-02 के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के दौरान करीब 32 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग, मिट्टी भराव, सड़क एवं नाली निर्माण को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान स्थानीय निर्माणकर्ताओं ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान बिना किसी बाधा के पूरा किया गया। जीडीए अधिकारियों के अनुसार ग्राम कनौजा स्थित खसरा संख्या-146 पर अमित चौधरी, मामचन्द्र त्यागी, ब्रह्मचन्द त्यागी तथा आदेश द्वारा लगभग 6,000 वर्गमीटर भूमि पर अवैध रूप से डिमार्केशन कर मिट्टी भराव का कार्य कराया जा रहा था। वहीं श्री दीपक चौधरी (चिपयाना वाले), सुचेत त्यागी एवं श्री वरुण शर्मा द्वारा लगभग 13,000 वर्गमीटर भूमि पर मिट्टी डालकर रास्ते विकसित किए जा रहे थे, जिससे अवैध कॉलोनी बसाने की तैयारी की जा रही थी। इसी क्रम में मुरादनगर क्षेत्र के खसरा संख्या-16 पर श्री डवन चौधरी एवं श्री अतुल त्यागी द्वारा लगभग 13,000 वर्गमीटर भूमि पर सड़क, नाली निर्माण तथा प्लॉटों की चिनाई कर अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान संबंधित व्यक्तियों से स्वीकृत मानचित्र एवं वैध भू-अभिलेख मांगे गए, लेकिन कोई भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके बाद प्राधिकरण ने मौके पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई। कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय निर्माणकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया, लेकिन जीडीए की प्रवर्तन टीम और पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए पूरे अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अभियान में प्रवर्तन जोन-02 का पूरा स्टाफ और प्राधिकरण पुलिस बल मौजूद रहा। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनियों और बिना स्वीकृति के किए जा रहे निर्माण के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी भूखंड या संपत्ति की खरीद से पहले उसकी वैधता एवं प्राधिकरण से स्वीकृति की पूरी जांच अवश्य कर लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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