कागजों में गड्ढामुक्त सड़क, हकीकत में कीचड़ से सना रास्ता

बरौली-कचनाऊ मार्ग पर जलभराव से हाहाकार, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र रोज झेल रहे दुश्वारी
मथुरा/बलदेव। प्रदेश सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे कर रही है, लेकिन बलदेव विधानसभा क्षेत्र में बरौली से कचनाऊ जाने वाला मार्ग सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। सड़क पर जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा है। हालात ऐसे हैं कि इस रास्ते से गुजरना राहगीरों के लिए मुसीबत बन गया है। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें इसी बदहाल रास्ते से होकर सरकारी मॉडल इंटर कॉलेज, सरकारी प्राथमिक विद्यालय और नर्सिंग कॉलेज पहुंचना पड़ता है।
बारिश के बाद मार्ग की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। कीचड़ और जलभराव के बीच विद्यार्थियों को विद्यालय-कॉलेज पहुंचना पड़ रहा है। इससे न केवल उन्हें आवागमन में परेशानी होती है, बल्कि अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है।
शिकायतें पहुंचीं, फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार
स्थानीय लोगों के अनुसार मार्ग की बदहाली को लेकर प्रशासन को कई बार लिखित रूप से शिकायत की जा चुकी है। पीड़ित ग्रामीणों ने समाचार पत्रों के माध्यम से भी जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का कई बार ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है।
इसके बावजूद मार्ग की स्थिति में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा। सोशल मीडिया पर भी बदहाल सड़क और जलभराव के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर शिकायतों, खबरों और वीडियो के बावजूद जिम्मेदार कब जागेंगे?
छात्र कीचड़ से निकलें या विकास के दावे मानें?
एक तरफ सरकार बेहतर सड़क और सुगम यातायात की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के मंदिरों तक पहुंचने वाला मार्ग बदहाली का शिकार है। ग्रामीणों का कहना है कि यह महज सड़क की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल है।
कचनाऊ निवासी अमित चौधरी एवं अन्य ग्रामीणों ने कहा कि समस्या को लेकर लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। कई बार ध्यान दिलाने के बावजूद यदि मार्ग की हालत नहीं सुधारी जाती तो अब ग्रामीणों के सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
अब केवल आंदोलन ही रास्ता?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बरौली-कचनाऊ मार्ग से जलभराव और कीचड़ की समस्या दूर कर सड़क को दुरुस्त नहीं कराया गया तो ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होना जिम्मेदार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह भी…
शिकायतों के बाद भी सड़क क्यों नहीं सुधरी?
किस विभाग की जिम्मेदारी है?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कब टूटेगी?
बच्चों को कब मिलेगा सुरक्षित रास्ता?
और आखिर कब तक ग्रामीण कीचड़ में चलने को मजबूर रहेंगे?



