4 सितंबर को जयंती योग समेत कई शुभ योगों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगाः आचार्य दीपक तेजस्वी

जन्माष्टमी पर्व पर जयंती योग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने से जन्म-जन्मांतर के पाप भी नष्ट हो जाते हैं
गाजियाबाद
आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को पूरे विश्व में श्रद्धा, भक्ति व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस बार का जन्माष्टमी पर्व बहुत खास होने वाला है क्योंकि 4 सितंबर को ऐसे शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने से जहां कई जन्मों के पापों का अंत होगा, वहीं सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण के प्राकट्य का उत्सव है। इस साल शुक्रवार 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर्व पर रात 11 बजकर 5 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र समाप्त होगा। यानि जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि के संयोग में मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के मिलने से पर्व पर अति शुभकारी जयंती योग बन रहा है। यह योग बहुत ही फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जयंती योग में जन्माष्टमी पर्व मनाना और व्रत रखना पूर्व जन्मों का पुण्यफल है और जन्म-जन्मांतर के पापों का भी इसमें नाश हो जाता है और हर प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है। जन्माष्टमी पर्व पर बन रहे सर्वार्थ सिद्धि योग से सभी कार्यो में सफलता प्रापत होती है तो वहीं हर्षण योग जीवन में प्रसन्नता, आनंद और उत्साह का संचार करता है। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि जन्माष्टमी पर्व पर माल्वय योग भी बन रहा है, जो सभी प्रकार के भौतिक सुख, वाहन, आभूषण और अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति कराता है। बुधादित्य राजयोग का संयोग भी बनेगा, जिसमें प्रशासनिक क्षमता, उच्च पद, नेतृत्व गुण और करियर में सफलता मिलती है। समाज में यश, धन और मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।


