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दवाओं की बर्बादी रोकने की दिशा में पायथन आधारित वेब टूल का प्रोटोटाइप विकसित

राजन कौशिक ने तैयार किया पायथन एवं SQLite आधारित डिजिटल समाधान, FIFO प्रणाली को किया शामिल

वेलकम इंडिया
नितिन शर्मा

बिजनौर। दवाओं की एक्सपायरी के कारण होने वाली संभावित बर्बादी को कम करने और दवा स्टॉक प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में आर वी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, बिजनौर के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कौशिक ने पायथन एवं SQLite डेटाबेस आधारित वेब टूल का प्रोटोटाइप विकसित किया है। इसमें दवाओं के डिजिटल रिकॉर्ड, एक्सपायरी मॉनिटरिंग तथा FIFO (First-In, First-Out) आधारित स्टॉक प्रबंधन की अवधारणा को शामिल किया गया है।
राजन कौशिक ने बताया कि फार्मेसी, मेडिकल स्टोर, अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में विभिन्न बैचों एवं अलग-अलग एक्सपायरी डेट वाली दवाओं का स्टॉक रहता है। ऐसे में दवाओं की एक्सपायरी और उपलब्ध मात्रा का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है। इसी दैनिक एवं व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए इस प्रोटोटाइप को विकसित किया गया है।
इस वेब टूल में दवा संबंधी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज कर SQLite डेटाबेस में व्यवस्थित रूप से संग्रहीत किया जाता है। प्रोटोटाइप में FIFO प्रणाली को भी शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत पुराने स्टॉक को पहले उपयोग करने की अवधारणा अपनाई जाती है। इससे दवाओं के स्टॉक के बेहतर रोटेशन और एक्सपायरी के कारण होने वाली संभावित बर्बादी को कम करने की दिशा में सहायता मिल सकती है।
राजन के अनुसार, दवा केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि मरीज के स्वास्थ्य और परिवार के संसाधनों से जुड़ी आवश्यकता है। इसलिए किसी दवा का अनावश्यक रूप से एक्सपायर होकर उपयोग से बाहर हो जाना केवल आर्थिक नुकसान का विषय नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा सामाजिक विषय भी है। इसी सोच के साथ उन्होंने तकनीक को फार्मेसी की एक वास्तविक समस्या से जोड़ते हुए इस प्रोटोटाइप को विकसित किया है।
यह सिस्टम वर्तमान में प्रोटोटाइप स्तर पर है। भविष्य में इसके परीक्षण, उपयोगकर्ता अनुभव और आवश्यकताओं के आधार पर इसमें और सुधार एवं सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं। उद्देश्य एक ऐसा सरल डिजिटल समाधान विकसित करना है, जो भविष्य में दवा स्टॉक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और दवाओं की अनावश्यक बर्बादी को कम करने में उपयोगी हो सके।
राजन लंबे समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं डिजिटल तकनीक के माध्यम से विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं के समाधान से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहे हैं। अपने तकनीकी सफर के बारे में बताते हुए वे कहते हैं कि उन्होंने कक्षा पांच से ही कंप्यूटर का अध्ययन शुरू किया था। समय के साथ तकनीक के प्रति उनकी रुचि विकसित होती गई और उन्होंने इसे फार्मेसी एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने का प्रयास किया।
फार्मेसी और पायथन प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में अपने अनुभव को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजन ने “Practical Exercises in Python for Pharmacy Students” नामक पुस्तक भी लिखी है। यह पुस्तक Amazon India के Kindle एवं e-book प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। पुस्तक के माध्यम से फार्मेसी विद्यार्थियों को पायथन प्रोग्रामिंग के व्यावहारिक प्रयोगों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।
वर्तमान में राजन ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की शुरुआती पहचान में सहायता से संबंधित एक परियोजना पर भी कार्य कर रहे हैं। उनका प्रयास स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक के उपयोग के माध्यम से ऐसी समस्याओं पर काम करना है, जिनका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है।
राजन ने अपनी इस पहल के लिए आर वी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रबंध निदेशक श्री सन्नी देशवाल, फार्मेसी के निदेशक एवं अपने शिक्षक प्रोफेसर डॉ. हितेश कुमार, अपने सभी शिक्षकों, माता-पिता, परिवारजनों तथा ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्थान, गुरुजनों और परिवार से मिले मार्गदर्शन, सहयोग एवं प्रोत्साहन ने उन्हें तकनीक को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया है।
पायथन एवं SQLite पर आधारित यह प्रोटोटाइप फार्मेसी और सूचना प्रौद्योगिकी के समन्वय से एक वास्तविक सामाजिक समस्या के समाधान की दिशा में किया गया प्रयास है। इसके माध्यम से तकनीकी ज्ञान को फार्मेसी शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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