पांच साल में बदली तस्वीर, भोजपुर-रजापुर में 7.32 मीटर तक ऊपर आया भूजल स्तर

गाजियाबाद। जनपद के अतिदोहित विकास खंड भोजपुर और रजापुर में भूजल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब जमीन पर असर दिखाने लगे हैं। प्री-मानसून 2021 की तुलना में प्री-मानसून 2026 में दोनों विकास खंडों के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। रजापुर में पांच वर्षों के दौरान भूजल स्तर 7.32 मीटर ऊपर आया है, जबकि भोजपुर में भी 1.06 मीटर का सुधार दर्ज किया गया है। जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी के नेतृत्व में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे कार्यों को इस सुधार की प्रमुख वजह माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्री-मानसून 2021 में भोजपुर विकास खंड का भूजल स्तर 11.61 मीटर था, जो प्री-मानसून 2026 में बढ़कर 10.56 मीटर हो गया। यानी भूजल स्तर में 1.06 मीटर का सुधार दर्ज किया गया। इसी तरह रजापुर में वर्ष 2021 में भूजल स्तर 20.10 मीटर था, जो वर्ष 2026 में 12.78 मीटर तक पहुंच गया। इस तरह पांच वर्षों में रजापुर में 7.32 मीटर का उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अतिदोहित क्षेत्रों में भूजल स्तर का ऊपर आना प्रशासन के जल संरक्षण अभियानों के प्रभाव को दर्शाता है।
भूजल स्तर को सुधारने के लिए जनपद में अमृत सरोवर योजना के तहत वर्ष 2023 से अब तक 104 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके अलावा भूगर्भ जल विभाग से जारी अनापत्ति प्रमाण-पत्रों के सापेक्ष भूजल रिचार्ज के लिए सीएसआर के माध्यम से विभिन्न विकास खंडों में 201 तालाबों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराया गया है। इनमें मोदीनगर तहसील के भोजपुर क्षेत्र में 66, मुरादनगर में 69, सदर तहसील में 55 और लोनी तहसील में 11 तालाब शामिल हैं। इन जल स्रोतों के पुनर्जीवन से वर्षा जल को संरक्षित करने और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। मुख्य विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में अमृत कूप योजना के तहत विकास खंड भोजपुर के ग्राम भोजपुर और अमराला में मृत कूपों का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया गया है। अब पोस्ट-मानसून 2026 में 10 से अधिक मृत कूपों का सत्यापन कराकर उनके पुनर्जीवन की योजना है। जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से अतिदोहित क्षेत्रों में भूजल संरक्षण की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। पांच वर्षों में सामने आए ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज के प्रयासों से जनपद के जल स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।



