पार्क से लिफ्ट और फ्लैट की दहलीज तक पहुंचा आवारा कुत्तों का आतंक
गाजियाबाद। जिले की बहुमंजिला सोसायटियों में आवारा कुत्तों की समस्या अब पार्क और पार्किंग तक सीमित नहीं रह गई है। कुत्ते लिफ्ट, सीढिय़ों और कॉरिडोर से होते हुए फ्लैटों के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य निवासियों में डर का माहौल बना हुआ है। कई सोसायटियों की एओए का आरोप है कि नगर निगम में लगातार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। निगम की टीम कुछ कुत्तों को पकड़कर ले जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद वे फिर उसी क्षेत्र में दिखाई देने लगते हैं। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडब्ल्यू सृष्टि सोसायटी के टावर-के की छठी मंजिल पर आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों के घूमने का सीसीटीवी वीडियो हाल ही में सामने आया था। वीडियो सामने आने के बाद सोसायटी के निवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। लोगों का कहना है कि जिस तरह कुत्ते लिफ्ट और सीढिय़ों के जरिए ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रहे हैं, उससे कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। सोसायटियों में पहले भी कुत्तों के काटने, बच्चों और बुजुर्गों का पीछा करने तथा कॉरिडोर में घूमने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई निवासी बच्चों को अकेले नीचे भेजने से भी बच रहे हैं। एओए पदाधिकारियों का कहना है कि समस्या की जानकारी नगर निगम को कई बार दी जा चुकी है। शिकायत मिलने के बाद निगम की टीम मौके पर पहुंचती है और कुछ कुत्तों को पकड़कर ले जाती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। ऐसे में लोगों का कहना है कि केवल कुत्तों को पकडऩे की कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। निवासियों के अनुसार संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। खासतौर पर उन कुत्तों पर ध्यान देना जरूरी है जो आक्रामक व्यवहार करते हैं या लोगों के लिए खतरा बन रहे हैं। सोसायटियों की एओए का कहना है कि नगर निगम को आरडब्ल्यूए और एओए के साथ बेहतर समन्वय बनाकर समस्या का समाधान करना चाहिए। संवेदनशील और आक्रामक कुत्तों की पहचान के साथ उनके लिए सोसायटी परिसर से बाहर उचित व्यवस्था की जरूरत है। साथ ही जिन स्थानों पर कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां नियमित निगरानी और कार्रवाई की जानी चाहिए। निवासियों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए इस समस्या को केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यदि शिकायत के बाद भी कुत्ते दोबारा उसी स्थान पर पहुंच जाते हैं तो कार्रवाई का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है। लोगों ने नगर निगम से ऐसी व्यवस्था की मांग की है जिससे सोसायटियों में रहने वाले लोगों को भयमुक्त वातावरण मिल सके।


