मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को गाजियाबाद में कौन दिखा रहा ठेंगा?

थाना कविनगर की FIR 0448 में दो महीने बाद भी आरोपी गिरफ्त से बाहर—ADCP के दो बार निर्देश के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं?
पीड़ित का गंभीर आरोप—विवेचक की निष्पक्षता पर संदेह; मोहाली में दबिश के नाम पर टैक्सी कराई, गोरखपुर का रेलवे टिकट भी कराया जबकि कोई आरोपी गोरखपुर का नहीं!
गाजियाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर लगातार जोर देते हैं, लेकिन गाजियाबाद के थाना कविनगर में दर्ज FIR संख्या 0448 की विवेचना को लेकर पीड़ित द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप पुलिस व्यवस्था और उसकी जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पीड़ित का कहना है कि मुकदमा दर्ज हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। आरोप है कि ADCP द्वारा दो बार गिरफ्तारी के निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
पीड़ित ने वर्तमान विवेचक (I.O.) की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर भी गंभीर संदेह जताया है। उसका आरोप है कि विवेचक ने स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी करने से इनकार किया और वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश के बावजूद आरोपी खुले घूम रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल कथित दबिश को लेकर उठ रहा है। पीड़ित के अनुसार मोहाली में दबिश के नाम पर उससे टैक्सी का खर्च कराया गया और गोरखपुर जाने के लिए रेलवे टिकट भी कराया गया, जबकि FIR में कोई भी आरोपी गोरखपुर का रहने वाला नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गोरखपुर जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इस कथित दबिश का उद्देश्य क्या था?
पीड़ित ने आशंका जताई है कि वर्तमान विवेचक के रहते निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं हो पाएगी। उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने, विवेचना किसी अन्य निष्पक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने तथा ADCP के निर्देशों का पालन न होने की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
अब सवाल यह है—जब वरिष्ठ अधिकारी दो बार गिरफ्तारी के निर्देश दे चुके हैं, तो आखिर कौन-सी वजह है जो आरोपियों की गिरफ्तारी में बाधा बनी हुई है?

