बाढ़ राहत की नाव ही हो गई चोरी प्रशासन की दी नाव गायब, ग्राम प्रधानों ने थाने में दी तहरीर

शास्त्रीनगर और भरतपुर के ग्राम प्रधानों ने हजारा थाने में दी तहरीर, नाव बरामदगी की मांग
वेलकम इंडिया पीलीभीत
पूरनपुर/हजारा, पीलीभीत। बरसात के मौसम में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई राहत नाव चोरी होने का मामला सामने आया है। नाव के गायब होने से ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। मामले में शास्त्रीनगर और भरतपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधानों ने थाना हजारा में तहरीर देकर अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई और नाव बरामद किए जाने की मांग की है।जानकारी के अनुसार, ग्राम शास्त्रीनगर के ग्राम प्रधान मनोज सिंह और ग्राम भरतपुर के ग्राम प्रधान शमशेर आलम ने बताया कि ट्रांस शारदा क्षेत्र में बरसात के दौरान बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की सहायता तथा राहत-बचाव कार्यों के लिए नाव उपलब्ध कराई गई थी। संबंधित नाव को क्षेत्र के एक नाले के पास सुरक्षित स्थान पर रखा गया था।बताया गया कि बीते दिनों अज्ञात लोग वहां से नाव चोरी कर ले गए। नाव गायब होने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों और संबंधित लोगों ने आसपास के इलाके में काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद ग्राम प्रधानों ने पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की।ट्रांस शारदा क्षेत्र में बारिश के दौरान शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ व जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में राहत कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई नाव का चोरी होना ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आपात स्थिति में इसी नाव के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिलनी थी।ग्राम प्रधानों का कहना है कि नाव किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण साधन थी। इसके चोरी होने से जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।काफी खोजबीन के बाद भी नाव का पता न चलने पर ग्राम प्रधान मनोज सिंह और शमशेर आलम ने थाना हजारा में तहरीर दी। उन्होंने पुलिस से अज्ञात चोरों की पहचान कर नाव बरामद करने और दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि नाव कहां गई और चोरी की घटना में कौन लोग शामिल हैं।


