आध्यात्म

जीवंत हुआ रामायण काल

“वनवास पदयात्रा ने भावुक किया”

केवट-राम संवाद में डूबा नगर

“भरत शरणागति पर गूंजा मैदान”

उज्ज्वल रस्तौगी मेरठ

श्री सनातन धर्म रक्षिणी सभा पंजीकृत मेरठ शहर के तत्वधान में श्री रामलीला कमेटी पंजीकृत मेरठ शहर द्वारा बुढ़ाना गेट स्थित जिमखाना मैदान में रामलीला का मंचन किया गया।

लीला मंचन के मुख्य उद्घाटनकर्ता डॉ विवेक बंसल वरिष्ठ सर्जन , मुख्य पूजनकर्ता अरविंद गुप्ता , मुख्य तिलककर्ता इन्द्र गर्ग भट्टे वाले रहे तथा प्रसाद सेवा भूषण सहदेव स्वर्ण महल ज्वेलर्स की और से की गयी।

मंचित लीलाओं ने उपस्थित जनसमूह को मानो त्रेतायुग में पहुँचा दिया। दर्शक अपनी सांसें थामे घटनाओं को देखते रहे और स्वयं को रामायण का ही पात्र समझने लगे।

प्रभु श्री राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण के साथ बनवास पर यात्रा को निकले तो अयोध्या वासियों के नेत्रों से आंसू छलक उठे हर दिल गम से भर गया ।
यह यात्रा सनातन धर्म मंदिर बुढ़ाना गेट से प्रारंभ होकर कोतवाली, गुदड़ी बाजार ,बजाजा सर्राफा, वैली बाजार, लाला का बाजार, शीश महल, सुभाष बाजार के चौराहे से भटवाड़ा, नौगजा, शहपीर गेट, सरस्वती मंदिर होते हुए सूरजकुंड पर रुकी। जब विभिन्न बाजारों से पदयात्रा करते हुए निकले तो नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
रामायण का दोहा गूँज उठा –
“रामु सिय लखन संग सिघाए, सुमिरि नगरबासी सब रोए।”
अर्थ: राम, सीता और लक्ष्मण के वन की ओर जाते ही नगरवासी स्मरण कर आँसू बहाने लगे।

श्रीराम के चरणों की पूजा कर जनसमूह ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। श्रद्धालुओं ने वंदन करते हुए कहा –
“आपकी चरण-धूलि से ही हमारा जीवन पवित्र है।”
दृश्य इतना जीवंत था कि अनेक दर्शकों की आँखें नम हो गईं।

केवट और श्रीराम का संवाद मंच पर आया तो पूरे मैदान में भावुकता छा गई।
राम: “केवट, हमें गंगा पार करा दो।”
केवट: “प्रभु! बिना चरण धोए नाव में बिठाना मुझे स्वीकार नहीं, क्योंकि आपकी चरण-धूलि से मेरी नाव भी मोक्ष पाएगी।”
इस पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।

“चरण पखारि गहि नाव चढ़ाए, केवट रामहि पार उतराए।”
अर्थ: चरण धोकर ही केवट ने राम को नाव में बैठाया और पार कराया।

श्रवण कुमार की सेवा भावना और फिर उनके दुखांत का मंचन होते ही दर्शकों के हृदय भर आए।
दोहा–
“पिता मातु प्रतिपाल कियो, श्रवण सब तन मन धन दियो।”
अर्थ: श्रवण कुमार ने तन-मन-धन सब लगाकर माता-पिता की सेवा की।
श्रवण के वध के पश्चात राजा दशरथ का वियोग और राम के वनवास का दुख दर्शकों के मन को झकझोर गया।
“राम बिना जीना मेरे लिए असंभव है।”
यह संवाद सुनते ही मैदान गूंज उठा और वातावरण शोकमय हो गया।

चित्रकूट में राम-सीता-लक्ष्मण का निवास दर्शाया गया। सादगी, तप और संतोष का चित्रण दर्शकों के मन में भक्ति भाव जगाने वाला रहा।

भरत जब राम से मिलने चित्रकूट पहुँचे तो उनका हृदयस्पर्शी संवाद मंचित हुआ।
भरत: “भैया! मैं आपका राज्य लेने नहीं आया, मैं तो आपके चरणों की धूल लेने आया हूँ।”

“राज न रामहि प्रिय लागै, भरतहि चरण प्रीति अनुरागै।”
अर्थ: राम को राज्य प्रिय नहीं, भरत को तो केवल चरणों का प्रेम ही प्रिय है।
यह दृश्य देखकर पूरा मैदान ‘भरत-राम’ के जयकारों से गूंज उठा।

रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने बताया कल दिनांक 15/10/2026 को जीमखाना मैदान बुढ़ाना गेट पर पंचवटी लीला, सूपनखां नाक छेदन, खरदूषण वध , पंचवटी में स्वर्ग मर्ग, रामजी द्वारा मृग का आखेट , लक्ष्मण सीता संवाद, साधू भेष में रावण, तथा सीता हरण का लीला मंचन होगा।
इस कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष मनोज गुप्ता राधा गोविंद मंडप, महामंत्री मनोज अग्रवाल खद्दर वाले, कोषाध्यक्ष योगेंद्र अग्रवाल बबलू, डॉ आलोक गुप्ता (गुप्ता क्लासेज), राकेश गर्ग, रोहताश प्रजापति, राकेश शर्मा, विपुल सिंघल , मयंक अग्रवाल, सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

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