गम, अकीदत और इंसानियत के पैगाम के साथ मनाया गया मोहर्रम,

हल्लौर में निकाला गया अलम, जूलजनाह का ऐतिहासिक मातमी जुलूस
वेलकम इण्डिया/असदुल्लाह सिद्दीकी
डुमरियागंज/सिद्धार्थनगर। जनपद में मोहर्रम का पर्व जुमा को गम, अकीदत और धार्मिक श्रद्धा के माहौल में मनाया गया। उपनगर हल्लौर में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने पारंपरिक जुलूस निकाला और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। पूरे क्षेत्र में “या हुसैन” या अली, या अब्बास की सदाओं के बीच माहौल गमगीन और भावुक बना रहा।
जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने जंजीरी मातम और सीनाज़नी कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंजुमन फरोग मातम, अंजुमन गुलदस्ता मातय द्वारा नौहाख्वानी और सीनाझनी की गई, जिससे माहौल पूरी तरह गम में डूबा नजर आया।
हल्लौर में आयोजित रोजे आशूरा की तकरीर के पोरोग्राम में मौलाना महफूज, जाकिर जमाल हैदर, अजीम हैदर आदि
वक्ताओं ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में ज़ुल्म और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सच्चाई, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी। तीन दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के बावजूद उन्होंने अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को अमन, भाईचारे, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद रहा। जुलूस के पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा तथा अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। मोहर्रम का आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय और सच्चाई के लिए हर कुर्बानी देने की प्रेरणा देने वाला संदेश भी है। हल्लौर का ऐतिहासिक मोहर्रम हर वर्ष की तरह इस बार भी अपनी धार्मिक परंपराओं, अनुशासन और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया।



