एनएच-9 बना रोडवेज बसों का अड्डा, 10 मिनट का सफर 40 मिनट में हो रहा पूरा
साहिबाबाद। दिल्ली-एनसीआर के व्यस्त मार्ग एनएच-9 पर रोडवेज बसों की मनमानी वाहन चालकों और यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। नोएडा सेक्टर-62, यूपी गेट और डासना के पास बसें सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़ी रहती हैं। इसके चलते रोजाना जाम की स्थिति बनती है और पांच से 10 मिनट का सफर तय करने में भी कई बार 30 से 40 मिनट तक लग जाते हैं। सड़क पर एक साथ आठ से 10 बसें खड़ी होने से ऐसा लगता है, मानो हाईवे को ही बस अड्डा बना दिया गया हो। बुधवार को भी इन स्थानों पर रोडवेज बसें कतार में खड़ी दिखाई दीं। बसों के रुकने के लिए एनएच-9 पर निर्धारित स्टॉप नहीं होने के बावजूद चालक यात्रियों के इंतजार में सड़क किनारे या मार्ग के हिस्से में बसें रोक रहे हैं। इससे हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और कई बार आधा मार्ग प्रभावित हो जाता है। बसों के कारण लगने वाले जाम को देखते हुए करीब पांच महीने पहले यातायात पुलिस ने परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर बसों को एनएच-9 पर अधिक देर तक नहीं रोकने के निर्देश दिए थे। कहा गया था कि चालक यात्रियों को बैठाने के बाद बस आगे बढ़ाएं, ताकि यातायात बाधित न हो। इसके बाद परिवहन निगम ने चालकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रवर्तन दल का गठन किया और उसकी 24 घंटे ड्यूटी भी लगाई गई। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बुधवार को पड़ताल के दौरान कई बसें करीब 20 से 30 मिनट तक खड़ी मिलीं। कुछ रूट की बसें आधे घंटे तक यात्रियों का इंतजार करती रहीं। नोएडा सेक्टर-62 और यूपी गेट के पास बस लेकर खड़े कुछ चालकों का कहना था कि वे यात्रियों का इंतजार कर रहे हैं और यात्री मिलने के बाद ही आगे बढ़ते हैं। चालकों के मुताबिक, बस में सीटों की क्षमता के सापेक्ष 55 प्रतिशत यात्री नहीं होने पर अधिकारियों की ओर से जुर्माना लगाया जाता है। इसी वजह से वे पर्याप्त सवारियां जुटाने के लिए रुकते हैं। वहीं, परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि चालकों को बस धीमी करके या जरूरत पडऩे पर एक-दो मिनट किनारे रोककर यात्रियों को बैठाने के निर्देश हैं। इसके बावजूद यदि चालक मनमानी कर रहे हैं तो ऐसे चालकों की सूची तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। एनएच-9 पर कई बार बसें तिरछी खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। इसके कारण कार, बाइक और अन्य वाहन रेंगते हुए निकलते हैं। विरोध करने पर कुछ चालक सरकारी बस होने का हवाला देकर लोगों से बहस करने लगते हैं। स्थानीय स्तर पर यातायात पुलिस की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि बसों को निर्धारित स्थानों पर ही रोका जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर कार्रवाई हो, तो हाईवे पर लगने वाले जाम से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।



