सावन के पहले सोमवार को दूधेश्वर धाम में बरसेगी भक्ति की अमृतधारा, भक्तों की सुविधा के लिए प्रशासन ने भी कसी कमर

गाजियाबाद। सावन के पहले सोमवार पर सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जहां हर ओर ‘हर-हर महादेवÓ और ‘बम-बम भोलेÓ के जयकारे गूंजेंगे। भगवान दूधेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों के स्वागत को दूधेश्वर धाम पूरी तरह तैयार है। मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य और अध्यक्षता में सावन के पहले सोमवार को शिवभक्ति की अमृतधारा बहेगी। भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक आज रात्रि 12 बजे से प्रारंभ होगा, जो सोमवार की रात्रि 12 बजे तक लगातार चलेगा। यानी पूरे 24 घंटे भक्तों को भगवान दूधेश्वर के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रबंधन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे चुका है। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को भगवान दूधेश्वर की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान दूधेश्वर की आराधना करने से भक्तों को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि इस बार सावन का पहला सोमवार कई दृष्टियों से विशेष है और मंदिर में आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुगम दर्शन एवं पूजा का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। जलाभिषेक का सिलसिला रात्रि 12 बजे से शुरू होगा और सोमवार की रात्रि 12 बजे तक जारी रहेगा। मंदिर के कपाट 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। रात्रि में सबसे पहले श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज भगवान दूधेश्वर की पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। महाराजश्री श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान करेंगे। सावन के पहले सोमवार पर मंदिर में आठों प्रहर पूजन का आयोजन होगा। इसके साथ भगवान दूधेश्वर का विशेष रुद्राभिषेक भी कराया जाएगा। श्री दूधेश्वर वेद विद्या संस्थान के आचार्य तोयराज उपाध्याय, आचार्य लक्ष्मीकांत पाढ़ी, मंदिर के प्रबंधक अमित कुमार शर्मा, शंकर झा सहित अन्य आचार्यों द्वारा धार्मिक विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक संपन्न कराया जाएगा। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को चार विशेष योग—प्रीति योग, आयुष्मान योग, सुकर्मा योग और शिव योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। प्रीति योग प्रेम, सौहार्द और आपसी सद्भाव बढ़ाने वाला माना जाता है, जबकि आयुष्मान योग में पूजा-अर्चना करने से आरोग्य और दीर्घायु की कामना की जाती है।
सुकर्मा योग को शुभ एवं पुण्य कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम माना गया है। वहीं शिव योग भगवान शिव को समर्पित होने के कारण शिव आराधना और साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में सावन के पहले सोमवार को भगवान दूधेश्वर की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिर में आने वाले भक्त महादेव से सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना करेंगे।
सावन के पहले सोमवार पर भगवान दूधेश्वर का दिव्य और भव्य श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। मंदिर के मीडिया प्रभारी एसआर सुथार ने बताया कि रात्रि करीब 2 बजे मोहित और उनकी टीम द्वारा भगवान दूधेश्वर का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी, दिल्ली गेट के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज द्वारा रात्रि 3.30 बजे धूप आरती और दीप आरती की जाएगी। दोपहर की आरती के बाद भगवान दूधेश्वर को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। संध्याकाल में भी महंत गिरिशानंद गिरि महाराज द्वारा धूप आरती और दीप आरती की जाएगी। श्री दूधेश्वर श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल एवं उनके सहयोगियों द्वारा भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। विशेष श्रृंगार के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार सावन के पहले सोमवार को दूधेश्वर धाम में देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालु सुगमता से भगवान दूधेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक कर सकें। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य और निर्देशन में दूधेश्वर धाम को शिवभक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि सावन का पहला सोमवार भक्तों के लिए केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुडऩे का महापर्व होगा। 24 घंटे जलाभिषेक, आठों प्रहर पूजन, रुद्राभिषेक, भव्य श्रृंगार, आरती और छप्पन भोग के साथ दूधेश्वर धाम में सावन के पहले सोमवार को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।



