यूपीआई पर शुल्क की खबर से व्यापारी परेशान, टीटू ने वित्त मंत्री से मांगी स्थिति स्पष्ट करने की अपील

गाजियाबाद। 2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क या टैक्स लगाए जाने की चर्चाओं के बीच व्यापारियों में बने भ्रम को दूर करने की मांग उठी है। अखिल भारतीय औद्योगिक एवं व्यापार महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारी इंदरजीत सिंह टीटू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस संबंध में व्यापारियों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे से 2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान को लेकर व्यापारियों और आम लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इंदरजीत सिंह टीटू ने कहा कि व्यापारी समाज की ओर से वह वित्त मंत्री के समक्ष यह बात रखना चाहते हैं कि 2 हजार से अधिक का यूपीआई भुगतान करने पर वास्तव में क्या व्यवस्था लागू होने जा रही है, इसे स्पष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस संबंध में अलग-अलग जानकारी सामने आने के कारण व्यापारियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि सरकार की ओर से स्पष्ट रूप से बताया जाए कि 2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान पर कोई टैक्स लिया जाएगा या नहीं। टीटू ने कहा कि यदि सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर दी जाती है तो व्यापारियों और आम लोगों के बीच चल रही चर्चाओं पर विराम लगेगा और लोगों को सही जानकारी मिल सकेगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय की ओर से 15 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी यूपीआई लेन-देन राशि की परवाह किए बिना नि:शुल्क रहेंगे। व्यापारियों को किए जाने वाले 2 हजार तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर व्यवस्था के तहत आने वाले लेन-देन भी नि:शुल्क रहेंगे। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमडीआर कोई सरकारी कर नहीं है और इसे सरकार या एनपीसीआई द्वारा कर के रूप में नहीं वसूला जाता। टीटू ने कहा कि व्यापारियों के लिए यूपीआई आज कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क या टैक्स से संबंधित किसी भी बदलाव की जानकारी स्पष्ट और आधिकारिक तरीके से सामने आनी चाहिए, ताकि व्यापारियों और ग्राहकों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार व्यापारियों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में जागरूकता बढ़ाएगी और सही स्थिति आम लोगों तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की अफवाह फैलाना नहीं, बल्कि व्यापारियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को दूर कराना है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यूपीआई से जुड़े नए नियमों और उनके प्रभाव की जानकारी सरल भाषा में व्यापारियों तक पहुंचाई जाए, जिससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर लोगों में विश्वास बना रहे।



