एक हजार में खरीद, बांग्लादेश तक सप्लाई! चोरी के मोबाइल का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चला रहा मालदा का सौरभ दास

गाजियाबाद। दिल्ली और गाजियाबाद के रेलवे स्टेशनों से यात्रियों के महंगे मोबाइल चोरी कर उन्हें बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक पहुंचाने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का नेटवर्क खंगालने में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) जुटी है। पुलिस की जांच में मालदा निवासी सौरभ दास का नाम इस नेटवर्क के कथित सरगना के रूप में सामने आया है। आरोप है कि गिरोह चोरी के महंगे मोबाइल बेहद कम कीमत पर खरीदता है और फिर बड़ी खेप में उन्हें आगे भेज देता है। हालांकि, सरगना की गिरफ्तारी नहीं होने से पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, करीब 40 हजार रुपये कीमत वाले स्मार्टफोन को गिरोह महज एक हजार रुपये में खरीद लेता है। इसके बाद 100 से 200 मोबाइल की खेप पहले पश्चिम बंगाल भेजी जाती है, जहां से कथित तौर पर इन्हें बांग्लादेश तक पहुंचाया जाता है। इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और मोबाइल की आपूर्ति से जुड़े रास्तों की जांच की जा रही है। जीआरपी अब गिरोह के डिजिटल संपर्कों और मोबाइल की आपूर्ति से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसमें उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियों से जुड़े वैध रूप से प्राप्त विवरण और वाई-फाई नेटवर्क के अभिलेखों का विश्लेषण महत्वपूर्ण हो सकता है। पुलिस का प्रयास है कि बरामद मोबाइलों के स्रोत और उनकी आगे की आपूर्ति के रास्तों का पता लगाकर पूरे नेटवर्क की कडिय़ां जोड़ी जाएं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के मोबाइल चोरी होने की घटनाओं के बीच इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल सौरभ दास की गिरफ्तारी और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है। पुलिस की कार्रवाई के बाद ही मोबाइल चोरी से लेकर सीमा पार तस्करी तक के पूरे नेटवर्क की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सौरभ दास कथित तौर पर अपने संपर्कों के लिए मोबाइल सिम का इस्तेमाल करने से बचता है। वह रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध वाई-फाई के जरिए इंटरनेट आधारित कॉलिंग और संदेश भेजने वाले अनुप्रयोगों का इस्तेमाल करता है। अलग-अलग स्थानों पर इंटरनेट सुविधा का उपयोग किए जाने के कारण उसकी पहचान और गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाना कठिन हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के मिठाई पुल के आसपास भी गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिली है। हालांकि, सौरभ दास के लगातार स्थान बदलने के कारण पुलिस को उसकी गतिविधियों की सटीक जानकारी जुटाने में परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि वह कभी मालदा तो कभी दिल्ली और गाजियाबाद के रेलवे स्टेशनों के आसपास पहुंचकर गिरोह के संचालन से जुड़ी गतिविधियां संभालता है। इस पूरे मामले में नौ अक्टूबर को जीआरपी ने गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरोह के एक कथित सदस्य को गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के 100 चोरी के मोबाइल बरामद किए गए थे। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने मोबाइल चोरी से लेकर उनकी खरीद-फरोख्त और दूसरे राज्यों तक आपूर्ति किए जाने की कडिय़ां जोडऩी शुरू कीं। जांच आगे बढऩे पर पुलिस को कथित सरगना सौरभ दास के बारे में जानकारी मिली। सूत्रों का कहना है कि वह अपने साथियों से सीधे मिलने से भी बचता है। पुलिस को उसके कुछ अहम दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है, जिनके आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

