एक अक्टूबर से अब पीयूसीसी दिखाओ, तभी पेट्रोल पाओ-एएनपीआर कैमरे लगाने और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के आदेश

गाजियाबाद। बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण और जनपद की हवा को साफ रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एक अक्टूबर से जिले में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना किसी भी वाहन को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने पेट्रोल पंप संचालकों को व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद की सभी पेट्रोलियम कंपनियों के सेल्स अधिकारियों, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ बैठक हुई। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लागू की जा रही नई व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। डीएम ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने प्रतिष्ठानों पर एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे अनिवार्य रूप से स्थापित कराने के निर्देश दिए। साथ ही कैमरों की नियमित रूप से कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होगी। इसके लिए सभी पेट्रोल पंपों पर कार्यरत कर्मचारियों को पहले से ही प्रशिक्षित किया जाए, ताकि उन्हें व्यवस्था के संबंध में पूरी जानकारी हो। वैध पीयूसीसी प्रमाणपत्र के बिना किसी वाहन को ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाए। पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी निर्देश दिए गए कि वे अपने स्तर से सभी पंप संचालकों और कर्मचारियों को आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराएं। डीएम ने स्पष्ट किया कि व्यवस्था को केवल सरकारी निर्देश मानकर औपचारिकता पूरी नहीं की जानी चाहिए, बल्कि इसे जनहित और पर्यावरण संरक्षण के अभियान के रूप में लागू किया जाए। पेट्रोल पंप संचालक और कर्मचारी वाहन चालकों को भी वैध पीयूसीसी रखने तथा समय-समय पर वाहनों की प्रदूषण जांच कराने के लिए जागरूक करें। बैठक में पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों और पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने जिलाधिकारी के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ, जिला सूचना अधिकारी योगेंद्र प्रताप सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी अमित तिवारी, एआरटीओ परिवहन अशोक श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि गाजियाबाद केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हम सभी का अपना जनपद है। जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति अपने घर को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए स्वयं जिम्मेदारी निभाता है, उसी भावना के साथ जनपद को भी अपना घर समझकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर में गंदगी होने पर लोग उसे साफ करने के लिए किसी दूसरे का इंतजार नहीं करते, बल्कि स्वयं आगे बढ़ते हैं। इसी तरह गाजियाबाद की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी सभी नागरिकों की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास केवल नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त वातावरण तैयार करना जरूरी है।



