आरटीई में लापरवाही पर डीएम का सख्त रुख-जिलाधिकारी ने 28 स्कूलों की बैठक लेकर एक सप्ताह में दाखिले पूरे करने के दिए निर्देश

गाजियाबाद। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में उन विद्यालयों को कड़ी चेतावनी दी गई, जिन्होंने अब तक पात्र बच्चों को प्रवेश नहीं दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी विद्यालय द्वारा आरटीई नियमों की अनदेखी की गई तो उसके विरुद्ध सीलिंग जैसी कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बैठक में जनपद के 28 निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। इनमें डीपीएसजी मेरठ रोड, सेठ आनंद राम जयपुरिया स्कूल, इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, केआर मंगलम स्कूल, डीपीएस पब्लिक स्कूल सिद्धार्थ विहार, दशमेश पब्लिक स्कूल, डीपीएस पब्लिक स्कूल इंदिरापुरम, ऐलन हाउस स्कूल, सहज इंटरनेशनल स्कूल, टीआरएम पब्लिक स्कूल भोजपुर, पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्कूल, ईस्ट दिल्ली स्कूल और कैम्ब्रिज स्कूल सहित अन्य प्रमुख विद्यालय शामिल रहे। बैठक के दौरान जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने प्रत्येक विद्यालय की क्रमवार समीक्षा की और दाखिले की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विद्यालयों ने अभी तक पात्र बच्चों को प्रवेश देने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इस पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए विद्यालय प्रबंधनों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि आरटीई कानून गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संवैधानिक अधिकार देता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर सभी चयनित बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित कर उसकी रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि कोई विद्यालय जानबूझकर दाखिला प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है या शासन के निर्देशों की अनदेखी करता है, तो ऐसे संस्थानों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पडऩे पर विद्यालयों को सील करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। डीएम के इस सख्त रुख के बाद बैठक में मौजूद स्कूल प्रतिनिधियों में गंभीरता दिखाई दी। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सीपी आर्य स्वर्णजयंतीपुरम विद्यालय पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। बताया गया कि विद्यालय प्रबंधन लगातार विभागीय निर्देशों की अवहेलना कर रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विद्यालय प्रबंधन को अगले दिन प्रात: अपने कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि विद्यालय की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय मानी जाएगी। बैठक में मौजूद कुछ अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के दाखिले से जुड़ी समस्याएं जिलाधिकारी के सामने रखीं। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन अनावश्यक दस्तावेज मांगकर दाखिले में देरी कर रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तत्काल स्कूल प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान कराएं और किसी भी पात्र बच्चे का अधिकार प्रभावित न होने दें। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों की नियमित निगरानी करें तथा आरटीई के अंतर्गत चयनित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित कराएं। जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

