शहर-राज्य

92 साल की सास को 84 कोस परिक्रमा कराने वाली काजल चौधरी का केएम विश्वविद्यालय में हुआ भव्य स्वागत 

मथुरा। आधुनिक युग में जहाँ रिश्तों में दूरियों की खबरें आम हैं, वहीं ब्रज भूमि से सेवा और समर्पण की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठा।  84 कोस परिक्रमा के दौरान बहु काजल चौधरी सौख-मगोर्रा क्षेत्र के गांव पाली डूंगरा पहुंचीं। उन्होंने इस दौरान सास-बहू एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।

कोसीक्षेत्र की रहने वाली काजल चौधरी अपनी सास चंद्री जिनकी उम्र 92 साल है। जो कि काजल चौधरी अपनी सास को सिर पर टब में बैठाकर बृज चौरासी कोस की परिक्रमा करा रही है। शनिवार को मगोर्रा क्षेत्र के पाली डूंगरा में स्थित केएम मेडीकल कॉलेज पर पहुंचने पर लोगो ने स्वागत सम्मान किया। तो वही केएम मेडीकल कॉलेज परिसर में ही सास बहू ने विश्राम किया। केएम अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने 92 वर्षीय चन्द्री की सेवा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। 

परिक्रमा के दौरान काजल चौधरी और उनकी सास ने केएम विश्वविद्यालय के परिसर में आराम किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं केएम हॉस्पिटल के चेयरमैन किशन चौधरी के बड़े भाई देवी सिंह (डीएम साहब) ने काजल के इस धर्मार्थ कार्य की सराहना करते हुए कहा आज के समय में अपनी सास को पुण्य प्राप्ति के लिए इस तरह परिक्रमा कराना बेहद दुर्लभ है। केएम परिवार काजल के इस जज्बे को नमन करता है और उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ देता है।

डीएम साहब देवी सिंह ने यह भी बताया कि केएम मेडिकल कॉलेज द्वारा सभी 84 कोस परिक्रमार्थियों के लिए भोजन, विश्राम गृह, स्नान गृह और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएँ लगातार मुहैया कराई जा रही हैं। वहीं, काजल चौधरी ने भी केएम विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन का आभार जताते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के लिए यहाँ की गई व्यवस्थाएँ वाकई सराहनीय हैं। इस धार्मिक और सामाजिक यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने सास और बहुओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवार में आपसी समझ, सम्मान और सहयोग से ही रिश्ते मजबूत बनते हैं। काजल चौधरी ने समाज में एकता, प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि 84 कोस परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह हमें संस्कार, एकता और रिश्तों की मजबूती का संदेश देती है। उन्होंने सभी सास और बहुओं से एक-दूसरे को समझने, सम्मान देने और परिवार को मजबूत बनाने का आग्रह किया। उनके इस संदेश को परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने सराहा, जिससे कार्यक्रम का माहौल धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द से भरपूर रहा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button