33 जिलों में एक साथ परखी आपदा से निपटने की तैयारी, घायलों के बचाव का किया अभ्यास-इंदिरापुरम में कमांडेंट सुदेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

गाजियाबाद। प्रदेश में आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए बुधवार को 33 जनपदों में एक साथ राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास कराया गया। आठवीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), गाजियाबाद की टीमों ने गाजियाबाद समेत मुरादाबाद, नोएडा, संभल, शाहजहांपुर, बुलंदशहर, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर और हापुड़ सहित विभिन्न जनपदों में निर्धारित आपदा परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त रूप से अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान ट्रेन दुर्घटना, भूकंप, रासायनिक-जैविक-रेडियोलॉजिकल-परमाणु आपातस्थिति तथा ढही हुई इमारत में खोज एवं बचाव जैसे परिदृश्य तैयार किए गए। एनडीआरएफ की टीमों ने घटनास्थल पर तेजी से पहुंचने, मलबे में फंसे लोगों की तलाश करने, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्राथमिक राहत एवं बचाव कार्य करने का व्यावहारिक अभ्यास किया। मॉक अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा, आपदा मित्र सहित विभिन्न विभागों और संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान आपात स्थिति में सूचना मिलने से लेकर राहत एवं बचाव दल के घटनास्थल तक पहुंचने, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता, चिकित्सा सहायता और विभागों के बीच समन्वय की स्थिति को परखा गया। अभ्यास के माध्यम से यह भी देखा गया कि वास्तविक आपदा की स्थिति में अलग-अलग विभाग कितनी तेजी से एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर राहत एवं बचाव अभियान चला सकते हैं। सामने आई संभावित कमियों का आकलन कर भविष्य में कार्रवाई को और अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। इंदिरापुरम में आयोजित मॉक अभ्यास में आठवीं वाहिनी एनडीआरएफ के कमांडेंट सुदेश कुमार ने स्वयं पहुंचकर अभ्यास का निरीक्षण किया और प्रतिभागी टीमों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ किसी भी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा से निपटने के लिए हर समय पूरी तत्परता के साथ तैयार रहती है। ऐसे संयुक्त अभ्यास से तैयारियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप परखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि 33 जनपदों में एक साथ आयोजित राज्य स्तरीय अभ्यास से एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को व्यवहारिक रूप से जांचा गया। अभ्यास के जरिए बेहतर तालमेल, प्रभावी संचार और त्वरित राहत एवं बचाव कार्रवाई की तैयारियों को और मजबूत किया गया।




