ट्रांस शारदा क्षेत्र दशकों से भीषण कटान की जद में, स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम का इंतजार

वेलकम इंडिया पीलीभीत
हजारा/पूरनपुर। ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी के लगातार हो रहे कटान ने ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दशकों से नदी की धार कृषि भूमि को अपने आगोश में ले रही है। हर वर्ष बरसात के मौसम में कटान और बाढ़ की समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी में समा चुकी है और ग्रामीण अब स्थायी समाधान की आस लगाए बैठे हैं। हाल के दिनों में भी हजारा क्षेत्र में शारदा के जलस्तर बढ़ने के साथ कटान की समस्या सामने आई है।ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही शारदा नदी का बहाव तेज हो जाता है। नदी की धार खेतों और आबादी की ओर बढ़ने लगती है, जिससे किसानों की वर्षों की मेहनत पर संकट खड़ा हो जाता है। कई स्थानों पर उपजाऊ कृषि भूमि तेजी से कटकर नदी में समा रही है। अगस्त में भी हजारा क्षेत्र में नदी के बढ़े जलस्तर के कारण खेतों में पानी भरने और दोबारा भू-कटान शुरू होने की स्थिति सामने आई थी।
हर साल बढ़ता खतरा
ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ और कटान से बचाव के लिए समय-समय पर राहत एवं बचाव कार्य किए जाते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि बरसात का मौसम समाप्त होते ही कटान रोकने और तटों को सुरक्षित करने से संबंधित योजनाएं तथा प्रस्ताव कागजों तक सीमित रह जाते हैं। अगले वर्ष बरसात आते ही वही समस्या दोबारा सामने खड़ी हो जाती है।
आश्वासन और प्रयासों के बावजूद समस्या बरकरार
कटान प्रभावित क्षेत्र में प्रशासनिक और राजस्व स्तर पर निरीक्षण भी किए जाते रहे हैं। हाल में राजस्व टीम ने हजारा क्षेत्र में कटान स्थल का जायजा लेकर प्रभावित किसानों की भूमि का ब्योरा तैयार किया और रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू की। बाढ़ खंड की ओर से भी कटान रोकने के लिए बचाव कार्य कराए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन ग्रामीण इन प्रयासों को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक योजना चाहिए जिससे नदी की धारा को आबादी और कृषि भूमि की ओर आने से रोका जा सके। इसके लिए संवेदनशील स्थानों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर मजबूत तटबंध, ठोकर और अन्य प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग उठ रही है।
स्थायी सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से शारदा नदी के कटान एवं बाढ़ की समस्या को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने, दीर्घकालिक कटानरोधी योजना तैयार करने और समय रहते कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल हर वर्ष राहत कार्य कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में कृषि भूमि के साथ गांवों पर भी खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों को अब इंतजार है कि शासन इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब धरातल पर उतारेगा।


